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जाएं तो जाएं कहां? चतरा में ठंड जीने नहीं दे रही और हाथी रहने नहीं दे रहे

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले में इन दिनों ग्रामीण आबादी एक ऐसी त्रासदी से गुजर रही है, जिसका समाधान फिलहाल किसी के पास नजर नहीं आ रहा। एक तरफ हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर और घना कोहरा है, तो दूसरी तरफ जंगली हाथियों का

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Chatra News: झारखंड के चतरा जिले में इन दिनों ग्रामीण आबादी एक ऐसी त्रासदी से गुजर रही है, जिसका समाधान फिलहाल किसी के पास नजर नहीं आ रहा। एक तरफ हाड़ कंपा देने वाली शीतलहर और घना कोहरा है, तो दूसरी तरफ जंगली हाथियों का खौफनाक तांडव। ठंड इतनी है कि बिना अलाव के रहना मुश्किल है, लेकिन हाथियों के डर से लोग घर के बाहर आग जलाने से भी कतरा रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि ग्रामीणों के लिए अब ‘आगे कुआं और पीछे खाई’ वाली स्थिति पैदा हो गई है।

पथलगड़ा और सिमरिया में हाथियों का डेरा; घर उजड़ने का सता रहा डर

जिले के पथलगड़ा और सिमरिया थाना क्षेत्र के दर्जनों गांवों में पिछले कई दिनों से हाथियों का एक विशाल दल लगातार विचरण कर रहा है। कोहरे की वजह से दृश्यता (Visibility) कम है, जिसका फायदा उठाकर हाथी अचानक बस्तियों के करीब पहुँच जा रहे हैं। रात होते ही ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। लोग टॉर्च और मशाल लेकर पहरा देने को मजबूर हैं। कई जगहों पर हाथियों ने कच्चे घरों को क्षतिग्रस्त किया है, जिससे बेघर होने का डर अब लोगों की आंखों में साफ देखा जा सकता है।

प्रशासन और वन विभाग से आस; कनकनी के बीच रात भर जाग रहे लोग

ग्रामीणों की पीड़ा बड़ी गहरी है—”जाएं तो जाएं कहां?” घर के भीतर रहें तो हाथी की चिंघाड़ डराती है और बाहर निकलें तो बर्फीली हवाएं जिस्म को सुन्न कर देती हैं। अलाव जलाना भी अब सुरक्षित नहीं लग रहा, क्योंकि हाथियों को आग से भड़काते देख वे और भी आक्रामक हो सकते हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल गश्ती बढ़ाने और हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर खदेड़ने की गुहार लगाई है। साथ ही, जिला प्रशासन से अलाव और कंबल की मुकम्मल व्यवस्था करने की भी मांग की गई है, ताकि इस दोहरी मार से जूझ रहे गरीबों को कुछ राहत मिल सके।

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