Patna: ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) के राज्य कार्यालय में आयोजित इस कार्यशाला में सीतामढ़ी, सीवान और अन्य सफल मॉडलों को पूरे राज्य में लागू करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
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कार्यशाला में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े उद्यमियों, रिसाइकलर्स, स्क्रैप डीलरों, जिला स्तरीय अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सीतामढ़ी मॉडल बना कार्यशाला का केंद्र
कार्यशाला का सबसे प्रमुख आकर्षण सीतामढ़ी मॉडल रहा, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। इस मॉडल के तहत सिंगल यूज प्लास्टिक से टेबल, बेंच और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
राय इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक संजीत राय ने बताया कि वैज्ञानिक प्रसंस्करण के जरिए प्लास्टिक कचरे को मूल्यवान उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
सीवान की ‘कबाड़ मंडी’ मॉडल की भी हुई चर्चा
कार्यशाला में सीवान की कबाड़ मंडी मॉडल को भी सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस मॉडल के तहत डिजिटल माध्यम से घर-घर से कबाड़ संग्रह, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था विकसित की गई है।
कबाड़ मंडी के प्रतिनिधियों ने इसकी कार्यप्रणाली, वित्तीय मॉडल और स्थानीय सहभागिता से जुड़े अनुभव साझा किए।
पूरे राज्य में नवाचार को बढ़ावा देने की तैयारी
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के मिशन निदेशक हिमांशु शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में काम कर रही नवाचारी संस्थाओं और उद्यमियों को राज्य सरकार हरसंभव सहयोग देगी।
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उन्होंने बताया कि नवाचार कोष के माध्यम से अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और पुनर्चक्रित प्लास्टिक से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
पर्यावरण, बाजार और रोजगार पर हुई विस्तृत चर्चा
दिनभर चली कार्यशाला में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों, मशीनों की क्षमता वृद्धि, माइक्रोप्लास्टिक के पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर प्रभाव, पुनर्चक्रित प्लास्टिक के बाजार, अंतरराज्यीय कच्चे माल की आपूर्ति और आय सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीआईपीईटी, यूनिसेफ, वाटर एड, वाटर फॉर पीपल, वाड्स फाउंडेशन, आईटीसी, पशुपति ग्रुप, राय इंडस्ट्रीज, इंडिया ट्रेडर्स और कबाड़ मंडी स्टार्टअप सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।





