Patna: बिहार में जल संरक्षण और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर कदम उठा रही है। ग्रामीण विकास विभाग के नेतृत्व में संचालित ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के अंतर्गत सार्वजनिक चापाकलों और पारंपरिक कुओं के किनारे व्यापक स्तर पर सोख्ता (Soak Pit) निर्माण कराया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दैनिक उपयोग के बाद व्यर्थ बहने वाले जल और वर्षा जल को दोबारा जमीन में समाहित कर ग्राउंड वाटर रिचार्ज को बढ़ावा देना है।
2.30 लाख से अधिक चापाकलों और 31 हजार कुओं पर सोख्ता निर्माण
अभियान के तहत जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सार्वजनिक चापाकलों के किनारे सोख्ता बनाने के लिए कुल 2,34,089 कार्य स्वीकृत किए गए थे। इनमें से 2,30,724 चापाकलों के पास निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 3,365 पर कार्य प्रगति पर है। इसी क्रम में सार्वजनिक कुओं के समीप सोख्ता निर्माण के कुल 31,492 लक्ष्य में से 31,323 कुओं पर कार्य पूर्ण हो चुका है और 169 स्थलों पर काम अंतिम चरण में है।
व्यर्थ बहने वाले पानी से रिचार्ज होगा भूजल
सोख्ता निर्माण का मुख्य वैज्ञानिक आधार यह है कि जो पानी नलों और कुओं के आसपास बहकर नालियों में बर्बाद हो जाता था, उसे फिल्टर कर व्यवस्थित रूप से वापस जमीन के भीतर भेजा जाए। इससे स्थानीय स्तर पर जलजमाव और गंदगी से मुक्ति मिलती है, साथ ही आसपास के भूजल स्तर में निरंतर सुधार होता है। इस अभियान के तहत सोख्ता निर्माण के अलावा सार्वजनिक तालाबों, पोखरों, आहर-पईन के जीर्णोद्धार, चेक डैम निर्माण और वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) पर भी एक साथ काम किया जा रहा है।
छोटे प्रयासों से होगा व्यापक बदलाव: मंत्री श्रवण कुमार
ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जल संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर उठाए गए छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बेहद सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव डालते हैं। उन्होंने बताया कि चापाकलों और कुओं के पास सोख्ता बनने से पानी को प्राकृतिक रूप से जमीन में पहुंचाने में बड़ी मदद मिल रही है। उन्होंने समुदाय से अपील की कि जल संरक्षण को अपनी आदत बनाएं, क्योंकि ‘जल-जीवन-हरियाली’ से ही समाज में वास्तविक खुशहाली संभव है।




