Patna: बिहार की लोक और शास्त्रीय कला-संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए राज्य सरकार की ओर से संचालित अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र युवाओं के लिए हुनर निखारने का मंच बन रहे हैं। वर्तमान में राज्य के 33 जिलों में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं, जहां करीब 3000 विद्यार्थी अपनी पसंद की कला विधाओं में प्रशिक्षण ले रहे हैं। शेष 5 जिलों में केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
33 जिलों में 3000 विद्यार्थियों को मिल रही कला की तालीम
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्रों की शुरुआत बिहार की लोक और शास्त्रीय कला परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उनके हस्तांतरण के उद्देश्य से की गई है।
इन केंद्रों में नवोदित और युवा कलाकारों को अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में अलग-अलग कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शास्त्रीय नृत्य, संगीत और वाद्य यंत्रों के साथ अन्य कला विधाओं को भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
सरकार का लक्ष्य राज्य के सभी 38 जिलों में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित करना है। फिलहाल 33 जिलों में केंद्र चल रहे हैं और बाकी 5 जिलों में इन्हें शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
पसंद की कला में निखर रही विद्यार्थियों की प्रतिभा
विभाग के अनुसार 33 प्रशिक्षण केंद्रों से करीब 3000 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। विद्यार्थी अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुसार नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इस पहल का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि कला और संस्कृति की शिक्षा केवल बड़े शहरों या चुनिंदा संस्थानों तक सीमित न रहे। जिला और स्थानीय स्तर पर युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण का अवसर मिले, ताकि वे अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकें।
तबला सीखने का सपना था, अब तीन तालों की समझ
मुंगेर के अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में तबला सीख रहे आयुष राज ने बताया कि उन्हें बचपन से तबलावादक बनने का शौक था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण वह इसकी तालीम नहीं ले पा रहे थे।
उनके मुताबिक केंद्र में दाखिला लेने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि हुनर को सिर्फ एक मौके की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि यहां तबला के साथ गायन और नृत्य का प्रशिक्षण भी अनुभवी प्रशिक्षकों से मिल रहा है।
आठ जुलाई से तबला सीख रहे आलोक
विद्यार्थी आलोक ने बताया कि उन्होंने 8 जुलाई से प्रशिक्षण केंद्र में तबला सीखना शुरू किया था। शुरुआत में उन्हें तबला की केवल बुनियादी जानकारी थी, लेकिन अब उन्हें तबला के तीनों तालों की तालीम मिल चुकी है।
उन्होंने इसके लिए कला एवं संस्कृति विभाग और मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
सहरसा में कथक सीख रही छात्रा
सहरसा स्थित अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में कथक सीख रही एक छात्रा ने बताया कि उसे बचपन से ही कथक में रुचि रही है। केंद्र के जरिए उसे इस कला में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
छात्रा के मुताबिक उसके प्रशिक्षक ने कथक के लखनऊ घराने की विधाओं के साथ हस्तक और फुटवर्क की जानकारी भी दी है।
पांच और जिलों में जल्द शुरू होंगे केंद्र
बिहार सरकार का लक्ष्य सभी 38 जिलों में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्रों को सक्रिय करना है। वर्तमान में 33 जिलों में केंद्र संचालित हो रहे हैं, जबकि शेष 5 जिलों में केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
इन केंद्रों के सभी जिलों में सक्रिय होने के बाद स्थानीय स्तर पर युवा और नवोदित कलाकारों को अपनी पसंद की कला में प्रशिक्षण लेने का अवसर और व्यापक होगा। इससे बिहार की लोक और शास्त्रीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की सरकार की कोशिश को भी विस्तार मिलने की उम्मीद है।





