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IDBI बैंक में 51% सरकारी हिस्सेदारी रखने की मांग, दूसरे दिन भी जारी रहा धरना

बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक परिसर में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में बैंक के महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए।

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जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित IDBI बैंक परिसर में प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में बैंक के महिला और पुरुष कर्मचारियों के साथ उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए। परिजनों ने धरना स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया और केंद्र सरकार से निजीकरण के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की।

नौकरी और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता

धरने में शामिल परिजनों ने कहा कि बैंक के निजीकरण से कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। उन्हें नौकरी की सुरक्षा, वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों के साथ बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

सरकार और LIC की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की मांग

कर्मचारियों का कहना है कि IDBI बैंक को घाटे से निकालकर मुनाफे तक पहुंचाने में अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्षों तक मेहनत की है। ऐसे में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी निजी निवेशक Fairfax को बेचने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार होना चाहिए।

कर्मचारियों ने मांग की कि बैंक में सार्वजनिक नियंत्रण बनाए रखा जाए और सरकार तथा LIC की संयुक्त हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत सुरक्षित रखी जाए। उनका कहना है कि बैंक को मजबूत बनाने के लिए निजीकरण ही एकमात्र रास्ता नहीं है।

कई बैंक अधिकारियों ने रखी अपनी बात

धरना-प्रदर्शन के दौरान तपन मुर्मू, राकेश मल्होत्रा, अमित कुमार, प्रभात कंसवार और प्रभात कुमार समेत कई बैंक अधिकारियों ने अपनी बातें रखीं।

कर्मचारियों ने कहा कि उनका आंदोलन सिर्फ नौकरी की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि बैंक के सार्वजनिक स्वरूप और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए भी है।

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