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पालकोट में पर्यावरण के लिए ‘न्याय’ की पुकार: बाघिमा में ग्रामीणों को दी सीख

पालकोट (गुमला): पालकोट प्रखंड की बाघिमा पंचायत में सोमवार को प्रकृति और कानून का संगम देखने को मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला के तत्वावधान में आयोजित ‘पर्यावरण न्याय जागरूकता शिविर’ ने ग्रामीणों को न केवल अपनी धरती को बचाने का संदेश दिया, बल्कि

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पालकोट (गुमला): पालकोट प्रखंड की बाघिमा पंचायत में सोमवार को प्रकृति और कानून का संगम देखने को मिला। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला के तत्वावधान में आयोजित ‘पर्यावरण न्याय जागरूकता शिविर’ ने ग्रामीणों को न केवल अपनी धरती को बचाने का संदेश दिया, बल्कि संकट के समय कानून का हाथ थामने का तरीका भी बताया। डालसा अध्यक्ष ध्रुव चंद्र मिश्रा और सचिव रामकुमार लाल गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों से रूबरू कराना था।

हवा, पानी और जमीन बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

शिविर के दौरान पीएलवी राजू साहू ने ग्रामीणों को बहुत ही सरल भाषा में पर्यावरण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण केवल पेड़-पौधे नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आधार है। हवा, पानी और मिट्टी अगर प्रदूषित होंगे, तो मानव जाति का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। कार्यक्रम में इस बात पर चिंता जताई गई कि किस प्रकार वनों की कटाई और प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए जहर बो रहा है।

प्रदूषण के खिलाफ ‘पांच सूत्र’ का मंत्र

ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच मुख्य सुझाव दिए गए: पहला—अधिक से अधिक पौधारोपण करना, दूसरा—पानी की हर बूंद का संरक्षण, तीसरा—प्लास्टिक का पूर्ण बहिष्कार, चौथा—जैविक खाद का उपयोग और पांचवां—रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर अब हमारे खेतों और स्वास्थ्य पर दिखने लगा है, जिसे रोकने के लिए पंचायत स्तर पर ही जागरूक होना होगा।

मुफ्त कानूनी सहायता: अधिकार अब आपकी पहुंच में

पर्यावरण के साथ-साथ शिविर में ‘डालसा’ द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि अगर वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किसी कानूनी विवाद में फंसे हैं, तो सरकार उन्हें मुफ्त वकील और विधिक सलाह उपलब्ध कराती है। इसके लिए उन्हें केवल डालसा कार्यालय से संपर्क करना होगा। शिविर में बड़ी संख्या में उपस्थित महिला-पुरुषों ने इस पहल को काफी सराहा और माना कि ऐसे कार्यक्रमों से न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि आत्मविश्वास भी मिलता है। बाघिमा की धरती से उठी यह जागरूकता की गूँज अब पूरे प्रखंड में बदलाव की उम्मीद जगा रही है।

संवाददाता- रोहित कुमार साहू

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