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कई मुल्क की करेंसी, 8 आधार कार्ड, 16 वोटर आईडी कार्ड….आंतकी फंडिग का लिंक

Bihar News: भारत-नेपाल सीमा से फिर चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां साइबर कैफे चलाने वाले भूषण चौधरी के ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी। पुलिस ने मौके से कई देशों की करेंसी, पासबुक, विदेशी घड़ी, 8 आधार कार्ड,

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Bihar News: भारत-नेपाल सीमा से फिर चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां साइबर कैफे चलाने वाले भूषण चौधरी के ठिकाने पर छापेमारी के दौरान पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी हाथ लगी। पुलिस ने मौके से कई देशों की करेंसी, पासबुक, विदेशी घड़ी, 8 आधार कार्ड, 8 ड्राइविंग लाइसेंस, 16 वोटर आईडी कार्ड, 6 श्रम कार्ड, 4 बैंक पासबुक, एक चेक बुक और 9 स्कैनर बरामद हुए है। इतना ही नहीं, कई अहम दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं जो मामले को और पेचीदा बना रहे है।

साइबर कैफे चलाने वाले भूषण चौधरी और उसका बेटा गोलू पुलिस के निशाने पर

मामला तब और गंभीर हुआ जब पता चला कि भूषण चौधरी का बेटा गोलू कुमार पहले ही यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। गोलू पर आरोप है कि वह आतंकी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियों में शामिल था। यूपी पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद गोलू को अपने साथ ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी है। अब मोतिहारी पुलिस भी गोलू को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, ताकि फंडिंग नेटवर्क का पूरा कनेक्शन सामने आ सके।

मुख्य आरोपी आलोक को तलाश रही पुलिस

सूत्रों के मुताबिक, पूरे मामले का मास्टरमाइंड आलोक कुमार नामक शख्स है, जिसकी तलाश अब पुलिस कर रही है। बताया जा रहा हैं कि आलोक ही पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर सीमावर्ती इलाके से आतंकी संगठनों तक फंडिंग पहुंचाने का काम करता था। भारत-नेपाल बॉर्डर हमेशा से संदिग्ध गतिविधियों का गढ़ रहा है। सीमा खुली होने की वजह से तस्करी, नकली नोट और अब आतंकी फंडिंग तक के मामले सामने आ रहे हैं।

इस खबर को भी पढ़ें: घोड़ासहन में टेरर फंडिंग का भंडाफोड़, विदेशी करेंसी और दस्तावेज बरामद

हाल ही में कई खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया था कि नेपाल की ओर से जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी संगठनों के लिए फंडिंग चैनल तैयार किए जा रहे हैं। इस बरामदगी ने उस आशंका को मजबूत किया है। हालांकि मोतिहारी पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बरामदगी की जानकारी दी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस की नजर अब उन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर है, जिससे कई राज खुल सकते हैं।

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