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झोले में मासूम का शव! मौत बनी सियासी तूफान की वजह, सरकार कटघरे में!

Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आई एक मार्मिक घटना ने झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी है। एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक मजबूर पिता को अपने बच्चे का शव थैले में रखकर घर ले जाना पड़ा। इस

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Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले से सामने आई एक मार्मिक घटना ने झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी है। एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक मजबूर पिता को अपने बच्चे का शव थैले में रखकर घर ले जाना पड़ा। इस हृदयविदारक मामले के सामने आने के बाद सियासी हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

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एम्बुलेंस के अभाव में बच्चे का शव थैले में ले जाने की घटना ने झकझोरा, पूर्व मंत्री ने सरकार और स्वास्थ्य मंत्री पर साधा निशाना!

शनिवार को पूर्व मंत्री एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और विशेष रूप से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का प्रतीक है। उनका आरोप है कि मौजूदा कार्यकाल में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और इसका खामियाजा आम जनता, खासकर गरीब और आदिवासी वर्ग, भुगत रहा है।

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बड़कुंवर गागराई ने कहा कि यह पहला मामला नहीं है, जब स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली उजागर हुई हो। उन्होंने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटनाओं, ब्लड बैंकों की बदहाल स्थिति, सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्री केवल पद और राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त हैं, जबकि जमीनी स्तर पर लोगों को इलाज तक नसीब नहीं हो पा रहा।

पूर्व मंत्री ने इस पूरे मामले को अमानवीय करार देते हुए झारखंड सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि स्वास्थ्य विभाग का संचालन पूरी तरह विफल हो चुका है, इसलिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।

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इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी आक्रोश है। लोग स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, एंबुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ करने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पश्चिमी सिंहभूम में यह मामला अब सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है।

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