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30 नवंबर तक ऑनलाइन अपलोड करें वार्षिक रिपोर्ट, वरना रद्द होगा रजिस्ट्रेशन

e-Nibandhan पोर्टल पर वार्षिक रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य, सरकार ने गैर-सरकारी संस्थाओं को दिया अंतिम मौका, डाक से भेजी रिपोर्ट होगी खारिज

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रांची: झारखंड में कार्यरत सभी सोसायटियों और निबंधित संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। निबंधन महानिरीक्षक अनिलसन लकड़ा के अनुसार, संस्था निबंधन अधिनियम, 1860 की धारा-4 तथा झारखंड संस्था निबंधन नियमावली, 2025 की धारा-8 के तहत सभी पंजीकृत संस्थाओं के लिए अपने वार्षिक दस्तावेज ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

वार्षिक विवरण और विदेशी फंडिंग का ब्योरा देना जरूरी

विभाग के निर्देशानुसार, सभी संस्थाओं को वर्ष में एक बार आम सभा की सहमति से पारित वार्षिक अंकेक्षण प्रतिवेदन (Audit Report), गतिविधि रिपोर्ट, कार्यकारिणी समिति की अद्यतन सूची तथा कार्यरत कर्मचारियों का पूरा ब्योरा प्रपत्र-‘क’ में देना होगा। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार, केंद्र सरकार या विदेशों से मिलने वाले किसी भी प्रकार के अनुदान अथवा आर्थिक सहायता से संबंधित रिपोर्ट प्रपत्र-‘ख’ में भरकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि डाक या ऑफलाइन माध्यम से भेजे गए किसी भी दस्तावेज को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संस्थाओं को मिला अंतिम अवसर

पूर्व में इन अनिवार्य प्रतिवेदनों को अपलोड करने के लिए 10 जून 2026 से 30 जून 2026 तक यूजर आईडी और पासवर्ड जारी किए गए थे। हालांकि, कई संस्थाएं तय समय-सीमा के भीतर क्रेडेंशियल्स प्राप्त करने से चूक गईं और उन्होंने विभाग से समय बढ़ाने की गुहार लगाई थी। संस्थाओं के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए विभाग ने एक अंतिम अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया है। अब संस्थाएं विभागीय पोर्टल (https://enibandhan.jharkhand.gov.in/) पर 25 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करके अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त कर सकती हैं।

लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई

विभाग ने दो टूक चेतावनी दी है कि 30 नवंबर 2026 के बाद किसी भी संस्था को यूजर आईडी और पासवर्ड निर्गत नहीं किया जाएगा। यदि कोई संस्था निर्धारित समय के भीतर क्रेडेंशियल प्राप्त कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने में विफल रहती है, तो उसके विरुद्ध भारी अर्थदंड लगाया जाएगा और नियमानुसार संस्था का निबंधन रद्द (कैनसलेशन) करने की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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