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नुक्कड़ नाटक और संवाद से टूटी मानसिक तनाव पर चुप्पी, गूंजी ‘वास्तविक आवाज़ें’

सलाह देने से पहले पीड़ा सुनना जरूरी, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर रिनपास में विशेष अभियान शुरू, 14 अक्टूबर तक चलेंगे जागरूकता कार्यक्रम

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Ranchi: किसी परेशान इंसान को बिना मांगे नसीहत देने से बेहतर है कि पहले आप उसकी बात को खामोशी और हमदर्दी से सुनें। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर 10 अक्टूबर को रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड अलाइड साइंसेज (रिनपास), कांके में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम का यह मूल संदेश हर किसी के दिल को छू गया। इस अवसर पर ओपीडी परिसर में मरीजों, परिजनों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और सामाजिक झिझक मिटाने का पुरजोर आह्वान किया गया।
इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की केंद्रीय थीम “सुनी जाएँ जीवन की अनुभूतियाँ : वास्तविक आवाज़ें, वास्तविक बदलाव” (Lived Experiences Heard: Real Voices, Real Change) रखी गई है। कार्यक्रम का मकसद उन लोगों के अनुभवों को मंच देना है जिन्होंने अवसाद, तनाव या मानसिक समस्याओं का खुद सामना किया है, ताकि उनकी सच्ची आवाजें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव की राह तैयार कर सकें।

नुक्कड़ नाटक के जरिए सीधे दिल तक पहुंचा संदेश

जागरूकता को औपचारिक भाषणों से बाहर निकालकर आम लोगों तक पहुंचाने के लिए नर्सिंग विद्यार्थियों ने ओपीडी परिसर में जीवंत नुक्कड़ नाटक पेश किए। पंजाब के ज्ञान सागर कॉलेज ऑफ नर्सिंग (रामनगर, राजपुरा) और जमशेदपुर स्थित कॉलेज ऑफ नर्सिंग, टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से यह दिखाया कि कैसे रोजमर्रा की जिंदगी में अनसुना तनाव इंसान को भीतर से तोड़ देता है।
नाटकों के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि मानसिक समस्या कोई कलंक या पागलपन नहीं है, बल्कि शरीर के अन्य रोगों की तरह ही एक स्वास्थ्यगत स्थिति है जिसका समय पर इलाज और परामर्श संभव है। विद्यार्थियों ने दर्शाया कि जब परिवार और समाज भावनात्मक सहारा बनते हैं, तो गंभीर से गंभीर मानसिक उलझनों से भी बाहर निकला जा सकता है।

मानसिक बीमारी की गैर-मौजूदगी ही मानसिक स्वास्थ्य नहीं

संस्थान के विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ केवल किसी बीमारी से मुक्त होना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के समग्र जीवन की गुणवत्ता, भावनात्मक संतुलन और रोजमर्रा की खुशहाली से जुड़ा विषय है। अक्सर लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे व्यक्ति को तुरंत राय देने लगते हैं या उसकी भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं। जरूरत इस बात की है कि बिना किसी पूर्वाग्रह के उनकी पीड़ा को समझा जाए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करने में उनकी मदद की जाए।

14 अक्टूबर तक जारी रहेगा जागरूकता अभियान

रिनपास प्रशासन ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने की यह मुहिम केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। 10 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2026 तक संस्थान में कार्यक्रमों की एक पूरी श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इसके तहत विभिन्न शैक्षणिक व नर्सिंग संस्थानों के छात्र-छात्राएं ओपीडी परिसर में नुक्कड़ नाटकों और संवाद सत्रों के माध्यम से जागरूकता की अलख जगाते रहेंगे।
रिनपास लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य के उपचार, पुनर्वास, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्थान का लक्ष्य है कि समाज में मानसिक विकारों से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त किया जाए, ताकि हर पीड़ित व्यक्ति बिना किसी डर या झिझक के खुलकर बोल सके और समय पर उपचार पा सके।
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