New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सोमवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत इंडिया ब्लॉक के कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने सीजेआई से मिलने के लिए समय मांगा था। विपक्षी नेता केंद्रीय चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और हालिया चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना चाहते थे। हालांकि, सीजेआई कार्यालय की ओर से इस मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद अब इस फैसले के पीछे की 5 मुख्य वजहें सामने आई हैं।
सीजेआई द्वारा मुलाकात न करने की 5 प्रमुख वजहें
विचाराधीन मामले (Sub Judice): विपक्षी नेता जिन मुद्दों को लेकर सीजेआई से मिलना चाहते थे, उनमें से कई मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं और उन पर नियमित सुनवाई चल रही है। ऐसे में किसी व्यक्तिगत मुलाकात का कोई प्रशासनिक या न्यायिक औचित्य नहीं बनता।
प्रशासनिक दखल का अभाव: भारतीय संविधान और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट कार्यपालिका या सरकार के प्रशासनिक कामकाज में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता। न्यायपालिका अपनी संवैधानिक सीमाओं और स्वायत्तता के दायरे में काम करती है।
न्यायिक रास्तों का विकल्प: यदि विपक्षी नेताओं या किसी भी नागरिक को अपने अधिकारों या व्यवस्था से जुड़ी कोई शिकायत है, तो उनके पास अदालत का दरवाजा खटखटाने का औपचारिक न्यायिक विकल्प मौजूद है। याचिका के माध्यम से विधिवत सुनवाई का प्रावधान होने के कारण व्यक्तिगत मुलाकात आवश्यक नहीं है।
समान मामलों की सुनवाई: जिन मुद्दों और आरोपों को लेकर विपक्षी नेता चर्चा करना चाहते थे, लगभग वैसे ही मिलते-जुलते मामले अदालतों में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। ऐसी स्थिति में नेताओं द्वारा दायर की जाने वाली याचिकाएं संबंधित मामलों के साथ ही सुनी जा सकती हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे।
प्रशासनिक निर्देश देने से इनकार: कांग्रेस नेताओं की ओर से सौंपे जाने वाले ज्ञापन और मांगों को लेकर यह स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे राजनीतिक या प्रशासनिक नीतिगत मामलों पर कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता। सर्वोच्च अदालत का मुख्य कार्य न्याय करना और कानून की समीक्षा करना है, न कि प्रशासनिक आदेश देना।
सूत्रों के अनुसार, यद्यपि सीजेआई ने व्यक्तिगत मुलाकात से इनकार कर दिया है, लेकिन विपक्षी नेताओं के पास देश के कानून और संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट में उचित याचिका दायर करने का पूरा अधिकार सुरक्षित है।




