रांची: राजधानी के डोरंडा थाना क्षेत्र में आयोजित उर्स मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त की पोल खुल गई है। मेले की गहमागहमी का फायदा उठाकर वाहन चोरों का गिरोह सक्रिय हो गया है और एक-एक करके कई वाहनों की चोरी को अंजाम दे रहा है। चोर इतने बेखौफ हैं कि आम लोगों के दोपहिया वाहनों के साथ-साथ गरीबों की रोजी-रोटी के साधन ई-रिक्शा (टूक-टूक) तक को नहीं बख्श रहे हैं।
ताजा मामला कांके थाना क्षेत्र के हुसीर गांव की रहने वाली जुगनू परवीन से जुड़ा है। उन्होंने डोरंडा थाना प्रभारी को दिए लिखित आवेदन में बताया कि उनके भाई मोहम्मद इरशाद 31 अगस्त 2026 की रात लगभग 10 बजे फाइनेंस पर ली गई सम्राट इलेक्ट्रिक व्हीकल ई-रिक्शा (रजिस्ट्रेशन नंबर JH01FV-5846) लेकर डोरंडा उर्स मेला गए थे। उन्होंने अपनी गाड़ी को शिवाजी चौक के पास अधिकृत पार्किंग स्थल पर खड़ा किया था।
रात करीब 12 बजे जब इरशाद वापस लौटे, तो पार्किंग स्थल से ई-रिक्शा गायब था। इतना ही नहीं, पार्किंग स्थल पर तैनात लड़के भी वहां से नदारद थे। इरशाद ने तुरंत अपने दोस्तों को बुलाकर आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन गाड़ी का कोई सुराग नहीं मिला।
इस घटना के बाद जब पीड़ित पक्ष शिकायत दर्ज कराने डोरंडा थाना पहुंचा, तो पुलिस के ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने उन्हें हैरान कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि डोरंडा थाना पुलिस ने उनकी मदद करने और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बजाय उल्टा यह कह दिया कि “चोर को पकड़कर थाना लेकर आओ।”
पुलिस के इस जवाब से आहत पीड़ितों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर चोर को पकड़ने का काम भी आम जनता को ही करना है, तो फिर पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था का क्या मतलब रह जाता है? मेले में जुटी हजारों की भीड़ के बीच से लगातार हो रही वाहन चोरियों ने स्थानीय प्रशासन की गश्त और पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





