Patna: संत श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में संचालित ‘संत श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान’ का अगला चरण 27 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इसके तहत राज्य के अनुसूचित जाति बहुल टोलों और क्लस्टरों में प्रत्येक गुरुवार को संत रविदास विकास शिविर लगाए जाएंगे। यह अभियान 27 अगस्त 2026 से 15 फरवरी 2027 तक निरंतर चलेगा, जिसके जरिए पात्र परिवारों को सरकार की 22 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं से सीधे जोड़ा जाएगा।
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टोलेवार होगी मैपिंग, परिवारवार जरूरतों की होगी पहचान
शिविरों के सफल संचालन के लिए पहले चिह्नित अनुसूचित जाति टोलों की विस्तृत मैपिंग की जाएगी। प्रशासन परिवारवार स्तर पर यह जांचेगा कि किन परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है और कौन-से पात्र परिवार अब भी वंचित हैं। इसके तहत आवास, राशन, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं की सूची तैयार की जाएगी ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति छूट न पाए।
एक ही छत के नीचे 22 प्रमुख योजनाओं का ऑन-स्पॉट समाधान
ग्रामीणों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाने के लिए सरकारी भवनों और मैदानों में ये शिविर आयोजित होंगे। यहां दस्तावेजों की जांच, आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया मौके पर ही पूरी की जाएगी। शिविरों में मुख्य रूप से इन 22 योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी:
दस्तावेज व पहचान: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान पत्र/पहचान दस्तावेज और जन-धन खाता।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति: राशन कार्ड और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना।
स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा: आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जीवन ज्योति एवं सुरक्षा बीमा।
आवास एवं बुनियादी ढांचा: प्रधानमंत्री आवास योजना, वास-भूमि बंदोबस्ती, हर घर नल-जल, पक्की गली-नाली और बिजली कनेक्शन।
रोजगार व शिक्षा: मनरेगा जॉब कार्ड, ई-श्रम कार्ड, कुशल युवा कार्यक्रम, निश्चय स्वयं सहायता भत्ता, आंगनबाड़ी सेवाएं और जीविका समूह।
‘दस्तावेज या जानकारी के अभाव में कोई वंचित न रहे’
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि अभियान का मुख्य मकसद अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास शिविरों का उद्देश्य केवल प्रचार करना नहीं, बल्कि शत-प्रतिशत संतुष्टि सुनिश्चित करना है ताकि जानकारी या कागजी अड़चनों की वजह से कोई भी पात्र परिवार अपने अधिकारों से वंचित न रहे।





