रांची। 4 सितंबर एक सदी से अधिक समय से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे कांके स्थित रिनपास ने शुक्रवार को 101वें स्थापना दिवस के साथ भविष्य की नई राह पर मंथन किया। जेई धुंजीभॉय अकादमिक एवं रिसर्च सेंटर में आयोजित समारोह में संस्थान की उपलब्धियों को याद करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

समारोह में चिकित्सकों, मनोचिकित्सकों, शोधकर्ताओं, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। स्वागत भाषण में प्रो. डॉ. अमूल रंजन सिंह ने कहा कि एआई चिकित्सा क्षेत्र में उपयोगी सहायक साबित हो सकता है, लेकिन चिकित्सकीय निर्णय और मानवीय सोच का स्थान नहीं ले सकता।
कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन के बाद स्मारिका का विमोचन किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करनेवालों को सम्मानित भी किया गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार महतो ने रिनपास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान की शुरुआत मुंगेर में मानसिक अस्पताल के रूप में हुई थी और आज यह कांके में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है।
उप निदेशक मिथिलेश कुमार चौधरी ने कहा कि बदलती तकनीक के दौर में रिनपास को एआई का प्रभावी इस्तेमाल करना होगा। वहीं निदेशक डॉ. जयति सिमलाई ने रोगी-केंद्रित सेवाओं को संस्थान की प्राथमिकता बताया। उन्होंने dTMS सुविधा और डि-एडिक्शन मैराथन जैसी हालिया उपलब्धियों की जानकारी दी।
मनोचिकित्सा से ओपीडी तक एआई की भूमिका पर चर्चा
कार्यशाला में मनोचिकित्सा, क्लिनिकल साइकोलॉजी, मनोरोग सामाजिक कार्य, दंत चिकित्सा और ओपीडी प्रबंधन में एआई के इस्तेमाल पर प्रस्तुतियां दी गयीं। विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने बताया कि तकनीक के सही उपयोग से सेवाओं को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाया जा सकता है। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र के बाद केक काटा गया और सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया ।




