Lifestyle Adda: हर माता-पिता की यह स्वाभाविक चिंता होती है कि उनका बच्चा कहीं किसी गलत संगत का शिकार न हो जाए। खासतौर पर स्कूली शिक्षा के संवेदनशील वर्षों में यह डर और अधिक बढ़ जाता है। यही वह दौर होता है जब बच्चे नए दोस्त बनाते हैं और उनके साथियों की आदतों का सीधा असर उनके व्यक्तित्व, व्यवहार और भविष्य पर दिखने लगता है। बाल मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चा इस उम्र में किसी गलत संगत में पड़ जाए, तो इसका बुरा प्रभाव जीवनभर बना रह सकता है। ऐसे में माता-पिता की सजगता, समय और सही मार्गदर्शन बच्चों को इस चुनौती से बचाने में सबसे अहम ढाल बनते हैं।
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बच्चों के दोस्तों को करीब से पहचानें
बच्चों को किसी भी तरह की बुरी संगत से दूर रखने का सबसे पहला और बुनियादी कदम है उनके दोस्तों के बारे में पूरी जानकारी रखना। पैरेंट्स को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि उनका बच्चा स्कूल या बाहर किन लोगों के साथ समय बिता रहा है और उनके स्वभाव कैसे हैं। बच्चों के फ्रेंड सर्कल को परखने का एक बेहतरीन और प्रभावी तरीका यह है कि घर पर समय-समय पर छोटी-मोटी किड्स पार्टी या बर्थडे पार्टी आयोजित करें। आप चाहें तो आइसक्रीम पार्टी जैसे छोटे आयोजन भी रख सकते हैं। इससे आपको बच्चे के हर दोस्त से व्यक्तिगत रूप से मिलने, बातचीत करने और उनके व्यवहार को समझने का सीधा मौका मिलता है।
संवेदनशील बच्चों पर सख्ती से बचें
बच्चों से व्यवहार करते समय उनके भावनात्मक पहलू को समझना बेहद जरूरी है। जो बच्चे ज्यादा संवेदनशील होते हैं, उनके साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतने से बचना चाहिए। ऐसे बच्चों के साथ नर्मी और धैर्य से पेश आएं। संवेदनशील बच्चे अक्सर बातों को गहराई से समझते हैं, इसलिए प्यार से समझाई गई बातें वे आसानी से अपना लेते हैं। इसके विपरीत, जरूरत से ज्यादा डांट-फटकार या सख्ती दिखाने पर बात संवरने की जगह बिगड़ सकती है और बच्चे बगावती होकर गलत दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
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खुद बनें बच्चे के सबसे अच्छे दोस्त
गलत संगत से सुरक्षित रखने का एक कारगर तरीका यह है कि माता-पिता खुद अपने बच्चे के सबसे अच्छे दोस्त बन जाएं। अक्सर व्यस्त दिनचर्या के चलते जब पैरेंट्स बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, तो बच्चे अकेलापन महसूस करने लगते हैं और बाहर की दुनिया में भावनात्मक सहारा तलाशते हैं। यदि आप उनके दोस्त बनकर बात करेंगे, तो उन्हें बाहर अनावश्यक दोस्त तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब बच्चे के साथ मजबूत बॉन्डिंग बनेगी, तो वह बिना किसी झिझक के अपनी हर परेशानी आपसे साझा करेगा। रोजाना बच्चों को दिया गया गुणवत्तापूर्ण समय ही उन्हें हर बुरी आदत से दूर रखने का सबसे मजबूत कवच साबित होता है।
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