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पड़ोसी पाकिस्तान में शिक्षा का बुरा हाल; दक्षिण एशिया में फिसड्डी!

Islamabad, (Pakistan): कंगाली और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों (2024-25) के मुताबिक, पाकिस्तान दक्षिण एशिया में शिक्षा के पायदान पर सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। 24 करोड़ की आबादी वाले

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Islamabad, (Pakistan): कंगाली और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों (2024-25) के मुताबिक, पाकिस्तान दक्षिण एशिया में शिक्षा के पायदान पर सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। 24 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 10 साल से ऊपर के केवल 63 फीसदी लोग ही अपना नाम लिखने या सरल वाक्य पढ़ने में सक्षम हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले छह सालों में साक्षरता की दर में महज 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसे विशेषज्ञ ‘कछुआ चाल’ और बेहद चिंताजनक बता रहे हैं।

इलाकों और लिंग के बीच गहरी खाई

रिपोर्ट के पन्ने पलटें तो पाकिस्तान के भीतर भेदभाव की गहरी लकीरें साफ दिखती हैं। जहां पुरुषों की साक्षरता दर 73 फीसदी है, वहीं महिलाओं के लिए यह आंकड़ा महज 54 फीसदी पर सिमट गया है। पंजाब प्रांत 68 फीसदी के साथ थोड़ा बेहतर है, लेकिन बलूचिस्तान की हालत बदतर है, जहां आधे से ज्यादा (51%) लोग अनपढ़ हैं।

रोटी या स्कूल: जनता के सामने मुश्किल चुनाव

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पाकिस्तानी अवाम के लिए अब ‘कलम’ से ज्यादा ‘रोटी’ का जुगाड़ करना भारी पड़ रहा है। पिछले 20 सालों में आम आदमी के बजट का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। बिजली, पानी और मकान के किराए इतने बढ़ गए हैं कि लोग अपने हिस्से का खाना कम करके इन बिलों का भुगतान कर रहे हैं। मध्यम से गंभीर ‘खाद्य असुरक्षा’ (भूख) का सामना करने वाले लोगों की संख्या एक-चौथाई हो गई है।

सरकारी तंत्र फेल, परिवारों पर बोझ

देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान में शिक्षा का ज्यादातर खर्च सरकार नहीं, बल्कि गरीब माता-पिता उठा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति के कारण लोग अपनी आधी-अधूरी कमाई निजी स्कूलों की फीस और ट्यूशन पर खर्च करने को मजबूर हैं। जब घर चलाने के लिए पर्याप्त भोजन न हो, तो ऐसे में शिक्षा पर अरबों रुपए खर्च करना पाकिस्तानी परिवारों की कमर तोड़ रहा है। यह रिपोर्ट साफ इशारा कर रही है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो पाकिस्तान की आने वाली नस्लें केवल अंधेरे भविष्य की ओर बढ़ेंगी।

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