फॉण्ट कनवर्टर NEW

मोसाद एजेंट की बेटी ने नाजी हत्यारे को कैसे बेनकाब कर दिया?

मोसाद एजेंट की बेटी ने नाजी आर्मी में हैवान लेफ्टिनेंट कर्नल की जासूसी की- 60 लाख यहूदियों के कत्ल का था आरोपी, नाम बदल कर अर्जेंटीना में रह रहा था? World News: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अगर किसी एक नाम ने यहूदियों के नरसंहार

अपनी भाषा में पढ़ें

मोसाद एजेंट की बेटी ने नाजी आर्मी में हैवान लेफ्टिनेंट कर्नल की जासूसी की- 60 लाख यहूदियों के कत्ल का था आरोपी, नाम बदल कर अर्जेंटीना में रह रहा था?

World News: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अगर किसी एक नाम ने यहूदियों के नरसंहार को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया, तो वो था लेफ्टिनेंट कर्नल एडोल्फ आइशमन। होलोकॉस्ट के दौरान करीब 60 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतारने की साजिश में शामिल यह व्यक्ति दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधियों में गिना जाता था।

कैसे वर्षों तक बचता रहा आइशमन

जर्मनी की हार के बाद आइशमन तीन बार पकड़ा गया, लेकिन हर बार फरार होने में सफल रहा। उसने “रैटलाइन” नाम का रास्ता पकड़कर यूरोप से भाग निकला और 1950 में अर्जेंटीना जाकर ‘रिकार्डो क्लेमेंट’ नाम से रहने लगा। वहां वह एक सामान्य आदमी की तरह जिंदगी गुजार रहा था, लेकिन इज़राइल उसे भूल नहीं पाया था।

मोसाद को मिला अहम सुराग

होलोकॉस्ट के इस कसाई को पकड़ने के लिए इज़राइल ने ‘ऑपरेशन फिनाले’ शुरू किया। जर्मन-यहूदी एजेंट फ्रिट्ज बाउर और अर्जेंटीनाई यहूदी लोथर हरमन ने आइशमन की लोकेशन का बड़ा सुराग दिया। कहा जाता है कि हरमन की बेटी, आइशमन के बेटे के करीब जाकर उसकी असली पहचान जान गई, और इसी से मोसाद को पक्का प्रमाण मिला।

अर्जेंटीना में गुप्त ऑपरेशन

मोसाद की टीम ब्यूनस आयर्स पहुँची और महीनों तक निगरानी की। आखिर 11 मई 1960 की शाम, आइशमन बस से घर लौट रहा था, तभी एजेंटों ने उसे दबोच लिया। उसके बाद उसे बेहोश कर इज़राइली एयरक्राफ्ट में फर्जी पहचान के साथ चुपके से बैठाया गया।

दुनिया के सामने आए उसके कारनामे

1961 में यरुशलम में आइशमन पर मुकदमा चला। यही वह मुकदमा था जिसने होलोकॉस्ट के दर्दनाक सच को दुनिया के सामने विस्तार से रखा। उस पर मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध समेत 15 आरोप लगे। दिसंबर 1961 में उसे दोषी ठहराया गया और 31 मई 1962 को फांसी दे दी गई।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram