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ईरान-अमेरिका में सुलह की कोशिश: मस्कट में हुई सीक्रेट डील, ट्रंप ने दिए संकेत

Muscat, (Oman): ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘काफी अच्छा’ बताया है। पिछले साल

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Muscat, (Oman): ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक पहल शुरू हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘काफी अच्छा’ बताया है। पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद, यह दोनों देशों के बीच पहली गंभीर और औपचारिक चर्चा मानी जा रही है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान एक नए समझौते के लिए उत्सुक है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला केवल अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर भी इस प्रक्रिया में सक्रिय दिखे। हालांकि बातचीत परोक्ष रही, लेकिन अराघची ने पुष्टि की है कि अमेरिकी दल के साथ उनका संक्षिप्त सीधा संपर्क हुआ और दोनों पक्षों के बीच शिष्टाचार स्वरूप हाथ भी मिलाए गए। दोनों देशों के प्रतिनिधि अब अपने शीर्ष नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद अगले सप्ताह पुनः चर्चा के लिए बैठेंगे।

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इस कूटनीतिक हलचल के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की वायुसेना कमांडरों की बैठक से अनुपस्थिति ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। 37 वर्षों में यह पहला मौका है जब खामेनेई इस सैन्य आयोजन में नहीं पहुंचे, जिसे तेहरान की बदली हुई रणनीति या सुरक्षा चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

समझौते की शर्तों की बात करें, तो ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को 60 प्रतिशत तक घटाने को तैयार है, बशर्ते उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएं। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि नए समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों पर भी अंकुश लगाया जाए। फिलहाल अराघची ने साफ कर दिया है कि ईरान संवर्धन को पूरी तरह बंद नहीं करेगा। एक ओर मेज पर बातचीत चल रही है, तो दूसरी ओर समुद्र में अमेरिकी नौसेना की तैनाती तनाव की गंभीरता को दर्शाती है। ट्रंप ने सैन्य विकल्प खुले रखने की चेतावनी दी है, तो ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। फिलहाल, ओमान की यह पहल युद्ध के खतरे को टालने की एक नई उम्मीद बनी हुई है।

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