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स्वास्थ्य बीमा बना पुलिसकर्मियों के लिए अभिशाप, इलाज से अस्पतालों का इनकार

Ranchi : झारखंड सरकार द्वारा राज्यकर्मियों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना अब कर्मचारियों के लिए वरदान नहीं बल्कि अभिशाप बनता जा रहा है। खासतौर पर पुलिसकर्मी और उनके परिवार इस योजना की खामियों से सबसे अधिक पीड़ित

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Ranchi : झारखंड सरकार द्वारा राज्यकर्मियों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना अब कर्मचारियों के लिए वरदान नहीं बल्कि अभिशाप बनता जा रहा है। खासतौर पर पुलिसकर्मी और उनके परिवार इस योजना की खामियों से सबसे अधिक पीड़ित नज़र आ रहे हैं। हर महीने वेतन से ₹500 की अनिवार्य कटौती के बावजूद जब इलाज की जरूरत पड़ती है, तब अस्पताल प्रशासन इस बीमा कार्ड को देखते ही इलाज से इनकार कर देता है।

उम्मीदों पर पानी फेर देता है अस्पताल

झारखंड पुलिस मैन्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष सबीलुर रहमान खान ने सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि राज्यभर से रोज़ाना दर्जनों पुलिसकर्मी रांची के अस्पतालों में इलाज की उम्मीद से पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल का रवैया उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। हाल ही में रिम्स पार्ट-2 घटना में घायल हुए तीन पुलिस जवान हिल व्यू अस्पताल में भर्ती हैं। उनका इलाज भी राज्य स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत नहीं हो रहा है। सवाल यह उठता है कि जब जवान ड्यूटी के दौरान घायल होते हैं, तब उनके इलाज का खर्च कौन उठाएगा? बीमा कंपनी ने इस जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

पीड़ित परिवार को प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी

सबसे हृदयविदारक मामला गुमला जिले के एक जवान का है। उनके पिता ऑर्किड अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन पहले ही लगभग ढाई लाख रुपये वसूल चुका है। अब हालत यह है कि जवान के पास और पैसे नहीं बचे। मजबूर होकर उन्होंने अपने पिता को मरनासन्न स्थिति में अस्पताल में छोड़कर लौटने का फैसला लिया। इससे भी अधिक शर्मनाक बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन पीड़ित परिवार को प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी तक दे रहा है। पुलिसकर्मी पहले से ही कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। कभी-कभी भीड़ नियंत्रण, अपराधियों से मुठभेड़ या संवेदनशील हालात में ड्यूटी निभाते हुए वे घायल हो जाते हैं। लेकिन जब इलाज की बारी आती है, तो स्वास्थ्य बीमा के नाम पर उन्हें ठगा जाता है। इस योजना के तहत हर महीने वेतन से कटने वाली रकम का कोई लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है।

स्वास्थ्य बीमा के नाम पर ठगे जा रहे पुलिसकर्मी

प्रदेश उपाध्यक्ष खान ने कहा कि पुलिसकर्मी अब बेहद नाराज़ और आक्रोशित हैं। उनकी मांग है कि इस बीमा योजना में तुरंत सुधार किया जाए, अन्यथा वेतन से होने वाली ₹500 की मासिक कटौती बंद की जाए। पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब उन्हें इस बीमा से किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है, तो इसका बोझ ढोने का औचित्य ही क्या है? यह मामला न केवल पुलिसबल बल्कि सभी राज्यकर्मियों के लिए चिंता का विषय है। स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य कर्मचारियों को निश्चिंत होकर सेवा देने का अवसर प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान हालात ने इसे अविश्वसनीय बना दिया है। यदि सरकार ने त्वरित कदम नहीं उठाए तो राज्यकर्मियों का विश्वास इस योजना से पूरी तरह खत्म हो जाएगा और विरोध तेज हो सकता है। पु​लिसकर्मी स्वास्थ्य योजना के नाम पर ठगे जा रहे हैं।

राज्य को-ऑर्डिनेटर लापरवाह, नहीं लेते सुध, कॉल भी नहीं उठाते

इस बाबत खबर का पक्ष लेने के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना के राज्य को-ऑर्डिनेटर गौरव कुमार के मोबाईल नंबर 7420072439 पर संपर्क किया गया हालांकि उन्होंने कॉल रिसिव नहीं किया। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि श्री कुमार को कई बार कॉल किया जाता है लेकिन वह कॉल रिसिव ही नहीं करते और न ही इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल कर रहे हैं जबकि एक माह पूर्व उनके वरीय अ​धिकारी छत्तीसगढ़ से रांची आए थे और वरीय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में DIG कार्मिक कार्यालय में सकारात्मक वार्ता हुई थी और उक्त समस्या का समाधान का वादा दिया गया था लेकिन श्री कुमार ने अब तक उक्त किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया।

पुलिसकर्मियों से 3 करोड़ 35 लाख रुपये प्रतिमाह वसूली

झारखंड पुलिस मैन्स एसोसिएशन के अनुसार कंपनी स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए प्रति पुलिसकर्मी 500 रुपये प्रतिमाह वसूलती है। राज्यभर में 67 हजार पुलिसकर्मी इस बीमा योजना से जुड़े हैं और प्रतिमाह 500 रुपये इस आस में जमा करते हैं कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें इसका लाभ मिलेगा किंतु लाभ के नाम पर उन्हें केवल ठेंगा दि​खा दिया जा रहा है। संपूर्ण रा​शि की बात करें तो कंपनी को पुलिसकर्मियों द्वारा जमा रा​शि से प्रतिमाह 3 करोड़ 35 लाख रुपये प्राप्त हो रहा है, बावजूद कंपनी ईलाज करने से कतरा रही है, जो नि:संदेह बड़े स्वास्थ्य घोटाले की ओर इशारा करता है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री एवं वरीय पुलिस अ​धिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है, ताकि पुलिस​कर्मियों को किसी तरह का मानसिक तनाव नहीं हो और वे नि​श्चिंत होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

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