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अरे… आपको पता है गरबा और डांडिया में क्या है अंतर?

India News: देशभर में वर्तमान में नवरात्र की धूम देखने को मिल रही है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहरों में से एक है। इस दौरान नौ दिनों तक माता रानी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूरे देश में इस त्यौहार को

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India News: देशभर में वर्तमान में नवरात्र की धूम देखने को मिल रही है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहरों में से एक है। इस दौरान नौ दिनों तक माता रानी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। पूरे देश में इस त्यौहार को धूमधाम से मनाया जाता है। खासकर गुजरात में इसकी खास धूम देखने को मिलती है।

इस दौरान होना वाला सबसे लोकप्रिय नृत्य में गरबा और डांडिया रास शामिल हैं। वर्तमान में सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि पूरे देश में गरबा और डांडिया की धूम है। हालांकि, दोनों की एक-दूसरे से काफी अलग होते हैं। आज हम आपको इन दोनों के बीच अंतर के बारे में ही बताएंगे।

क्या है डांडिया?

डांडिया रास, जिस अक्सर डांडिया भी कहा जाता है, नवरात्र के दौरान किया जाने वाला एक लोकप्रिय नृत्य है। इस गुजरात का तलवार नृत्य भी कहा जाता है, क्योंकि इस डांस में इस्तेमाल की जाने वाली लाठियां तलवारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। डांडिया करने के लिए हर एक व्यक्ति दो सजी हुई छड़ियां या डांडिया लेकर अपने पार्टनर के साथ ताल से ताल मिलाकर डांस करता है। गरबा की तुलना में डांडिया नृत्य काफी तेज और ज्यादा एनर्जी से भरपूर होता है।

डांडिया अक्सर विजय और खुशी का जश्न मनाने के लिए किया जाता है।

क्या है गरबा?

गरबा एक पारंपरिक गुजराती लोक नृत्य है, जो मिट्टी के दीये (गरबो) या देवी दुर्गा की मूर्ति के चारों ओर एक गोला यानी सर्किल बनाकर होता है। गरबा शब्द गर्भ से आया है, जो जीवन और सृजन का प्रतीक है। गरबा ताली बजाकर, हाथों के सुंदर पॉश्चर और रिदम के साथ पैरों को चलाकर किया जाता है। इसके गीत आमतौर पर भक्तिमय होते हैं, जिसमें देवी अम्बा या दुर्गा की स्तुति की जाती है। गरबा के दौरान महिलाएं चनिया चोली (रंगीन स्कर्ट और ब्लाउज) और पुरुष केडियू (छोटा कुर्ता) पहनते हैं।

गरबा-डांडिया का इतिहास

गरबा: गरबा शब्द संस्कृत शब्द गर्भ से आया है। इस नृत्य को आमतौर पर एक मिट्टी के मटके के चारों ओर घेरा बनाकर किया जाता है, जिसके अंदर एक दीया होता है। इस दिये को गर्भदीप कहा जाता है, जो गर्भ में पल रहे भ्रूण और जीवन के निरंतर चक्र का प्रतीक है। इस तरह गरबा का संबंध जीवन के चक्र और देवी दुर्गा की शक्ति से है।

वहीं डांडिया देवी दुर्गा और भगवान कृष्ण दोनों से जुड़ा माना जाता है। पौराणिक कथा के मुताबिक डांडिया देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध की याद में किया जाता है। इस डांस में इस्तेमाल होने वाली रंगीन छड़ियां या डांडिया देवी की तलवारों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।

वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि यह भगवान कृष्ण की दिव्य कथाओं से जुड़ा है। इसकी उत्पत्ति संभवतः रास लीला से हुई है, जो कृष्ण और गोपियों का साथ किए जाने वाला एक नृत्य है। इसे रास लीला भी कहा जाता है। इस नृत्य का नाम इसमें इस्तेमाल की जाने वाली डांडिया की छड़ियों से आया है।

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