Patna: बिहार का गौरव माना जाने वाला ‘मिथिला मखाना’ अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। राज्य का मखाना अब तक दुनिया के 20 से अधिक देशों के बाजारों तक सफलतापूर्वक पहुंच चुका है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से बिहार सरकार जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त इस सुपरफूड को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयां देने के लिए लगातार काम कर रही है। इस वर्ष अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस जैसे प्रमुख देशों में बिहार के मखाना उत्पादों का निर्यात किया गया है।
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‘मखाना से समृद्धि अभियान’ और पांच वर्षीय कार्ययोजना
बिहार सरकार मखाना को वैश्विक स्तर पर एक स्थापित सुपरफूड बनाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ के तहत एक व्यापक पांच वर्षीय कार्ययोजना पर काम कर रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मखाना की खेती के क्षेत्रफल को दोगुना करना, उत्पादन में भारी बढ़ोतरी करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की हिस्सेदारी को और अधिक मजबूत करना है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि देश के कुल मखाना उत्पादन में अकेले बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और इसके मूल्यवर्धित (value-added) उत्पादों का 20 से अधिक देशों को निर्यात किया, जिससे लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय प्राप्त हुई। अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों में भारतीय मखाना की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है।
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उत्पादन और निर्यात के बड़े लक्ष्य
इस योजना के तहत सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए कई बड़े और दूरगामी लक्ष्य तय किए हैं:
खेती का दायरा: खेती का क्षेत्रफल वर्ष 2025-26 के 41 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 2030-31 तक 82 हजार हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
उत्पादन लक्ष्य: इसी अवधि तक पॉप मखाना का कुल उत्पादन 91,512 मीट्रिक टन तक पहुंचाने की योजना है।
निर्यात लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2030-31 तक मखाना का कुल निर्यात बढ़ाकर 30 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वित्तीय प्रावधान: वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना में 8,979.68 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका उपयोग उत्पादन सहायता, कटाई के बाद की बुनियादी सुविधाओं, अनुसंधान एवं विकास (R&D), ब्रांड विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए किया जाएगा।
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किसानों की आय में 12 गुना से अधिक की वृद्धि
मखाना क्षेत्र के विकास से राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:
वर्ष 2012-13 में मखाना से किसानों की आधारभूत आय 35,000 रुपये प्रति हेक्टेयर थी।
वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4,25,750 रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई है।
इस प्रकार किसानों की प्रति हेक्टेयर आय में 12 गुना से अधिक की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
‘बिहार विजन-2030’ और वैश्विक पहचान
बिहार सरकार के ‘बिहार विजन-2030’ के तहत यह बड़ा लक्ष्य रखा गया है कि दुनिया में खपत होने वाले मखाने के हर दो पैकेट में से कम से कम एक पैकेट पर मिथिला मखाना का जीआई चिह्न (GI Tag) जरूर हो। हाल ही में, पहली बार बिहटा स्थित बियाडा (BIADA) औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की एक बड़ी समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। गुणवत्ता, जीआई पहचान और बेहतर बाजार संपर्कों के कारण बिहार के मखाना किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खुल रहे हैं।
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