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पटना सरस मेला: 41 लाख की रिकॉर्ड बिक्री, मखाना और साड़ियों की धूम

पटना के ज्ञान भवन में आयोजित सरस मेले के शुरुआती दो दिनों में 42 हजार से अधिक लोग पहुंचे, जहां 135 स्टॉल्स के जरिए कुल ₹41.18 लाख का कारोबार दर्ज हुआ।

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Patna: पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित ‘सरस मेला 2026’ में खरीदारी को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर है। मेले के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही 42 हजार से अधिक आगंतुक पहुंचे हैं। इस दौरान मेले में लगे 135 स्टॉल्स पर कुल 41.18 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया। मेला समन्वयकों के अनुसार उद्घाटन के दिन रविवार को 20.28 लाख रुपये और दूसरे दिन सोमवार को 20.90 लाख रुपये की बंपर बिक्री हुई। देश के विभिन्न राज्यों और बिहार के ग्रामीण इलाकों से आईं महिला उद्यमी अपनी कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं।

मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ियों और प्राकृतिक रंगों का दिखा आकर्षण

तुलसी विश्वाश, मध्यप्रदेश

मेले में मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से आईं शिल्पकार तुलसी विश्वास के स्टॉल पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। वह दूसरी बार पटना के सरस मेले में भाग ले रही हैं। उनके स्टॉल पर पेड़ों की पत्तियों और छाल के प्राकृतिक रंगों से तैयार की गई रॉ-सिल्क टसर मिक्स और चंदेरी कॉटन की 6.50 मीटर लंबी साड़ियां लोगों को बेहद पसंद आ रही हैं। तुलसी विश्वास का कहना है कि सरस मेला देशभर की कामकाजी और स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं के लिए अपनी प्रतिभा और कला को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का एक मजबूत मंच साबित हो रहा है।

मिथिला मखाना की जबर्दस्त मांग, रोजाना सैकड़ों ग्राहक पहुंच रहे

सहरसा से आईं जीविका दीदी रमा देवी ने बताया कि सरस मेले में मिथिला मखाने को लेकर खरीदारों में खासा उत्साह है। मेले के पहले ही दिन उनके स्टॉल से 5 हजार रुपये से अधिक का मखाना बिका। रोजाना करीब 100 से अधिक लोग मखाना उत्पादन और इसकी गुणवत्ता की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। रमा देवी के अनुसार, कृषि नीतियों और प्रोत्साहन के चलते सीमांचल और कोसी क्षेत्र में मखाना उत्पादन से जुड़ी हजारों महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

‘दीदी की रसोई’ में पारंपरिक लिट्टी-चोखा का स्वाद ले रहे लोग

हस्तशिल्प और परिधानों के अलावा मेले के फूड कोर्ट में भी भारी चहल-पहल है। पटना के लोदीपुर स्थित पुलिस लाइन में संचालित ‘दीदी की रसोई’ की सदस्य तन्नू कुमारी ने बताया कि सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत मिले सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। उनके स्टॉल पर पटना और आसपास के जिलों से आए लोग ठेठ बिहारी अंदाज में बने लिट्टी-चोखा, मुर्गा-चावल और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं। मेले में राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों के प्रतिभागियों का कहना है कि यह आयोजन ग्रामीण कारीगरों को बड़ा बाजार देने में पूरी तरह सफल रहा है।

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