मुंबई: मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली ‘बेस्ट’ (BEST) की ई-बस सेवा निजी ऑपरेटरों की बड़ी लापरवाही के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। समय पर बिजली बिल का भुगतान न किए जाने के चलते अदानी पावर कंपनी ने मझास और गोराई समेत कई प्रमुख बेस्ट डिपो की बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इस कदम के कारण दर्जनों इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग समय पर नहीं हो सकी, जिससे ये बसें डिपो से बाहर सड़कों पर नहीं उतर पाईं।
सड़कों पर ई-बसों की अचानक हुई भारी कमी की वजह से हजारों आम यात्रियों को बस स्टॉप पर घंटों इंतजार करना पड़ा। ऐन वक्त पर बसें न मिलने के कारण मजबूरन लोगों को महंगे ऑटो, टैक्सी और अन्य निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा।
इस गंभीर मुद्दे को बेस्ट समिति के सदस्य और भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह ने प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव को एक ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ भेजकर पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच कराने और दोषी ऑपरेटरों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
अजय सिंह ने बताया कि बेस्ट प्रशासन निजी ऑपरेटरों को वित्तीय संकट से बचाने के लिए हर महीने की 7 तारीख से पहले ही उनके बिल का 80 प्रतिशत भुगतान नियमित रूप से कर देता है। इसके बावजूद ऑपरेटर बिजली बिल जमा करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसका सीधा खामियाजा मुंबई के निर्दोष यात्रियों और बेस्ट की साख को भुगतना पड़ रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने निजी ऑपरेटरों द्वारा चलाई जा रही बसों की खस्ताहाल स्थिति और रखरखाव की कमी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में कई बसों की छत से पानी टपकता है, जिससे यात्रियों को बस के अंदर भी छाता लगाकर बैठना पड़ता है। कई एसी बसों के कूलिंग सिस्टम खराब हैं, जिससे पूरा किराया देने के बावजूद यात्री उमस में सफर करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि बेस्ट की विश्वसनीयता और यात्रियों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे लापरवाह ठेकेदारों पर कार्रवाई बेहद जरूरी है।




