मुंबई: महाराष्ट्र के अन्न व औषधि प्रशासन (FDA) में एक तरफ जहां आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में मिलावटखोरों और अवैध कारोबारियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के भीतर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं। एफडीए प्रयोगशाला के 29 अधिकारियों और कर्मचारियों ने आयुक्त मुंढे की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एफडीए मंत्री नरहरि झिरवल से लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
छत्रपति संभाजीनगर स्थित एफडीए लैब के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मंत्री झिरवल को सौंपे अपने शिकायत पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र पर 29 कर्मचारियों के हस्ताक्षर हैं, जिसमें कहा गया है कि आयुक्त द्वारा बिना पर्याप्त संसाधनों के दो शिफ्टों में काम करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा शनिवार, रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों के दिन भी काम करने के कड़े आदेश जारी किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव बन रहा है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रयोगशाला में लंबे समय से कर्मचारियों और तकनीकी सहायकों के पद खाली पड़े हैं। इन रिक्त पदों को भरे बिना काम का बोझ मौजूदा कर्मचारियों पर डाल दिया गया है। भारतीय औषध संहिता (IP), ब्रिटिश (BP) और यूएसपी (USP) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दवाओं और खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच के लिए एक निश्चित समय और प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
कर्मचारियों का आरोप है कि पेंडिंग पड़े सैंपलों का निपटारा जल्दबाजी में कराने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे नमूनों के जांच परिणामों और गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एक तकनीशियन प्रति माह सीमित नमूनों की ही सटीक जांच कर सकता है, लेकिन अत्यधिक वर्कलोड के कारण स्थिति चिंताजनक हो गई है। कर्मचारियों ने मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने और कार्य परिस्थितियों को व्यावहारिक बनाने की मांग की है।




