Nainital: उत्तराखंड की हसीन और हरी-भरी वादियों के बीच नैनीताल जिले में स्थित श्री कैंची धाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित यह पावन स्थल महान संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) की दिव्य कर्मस्थली और साधना भूमि है। यह जगह केवल एक तीर्थस्थल भर नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा, शांति और अटूट विश्वास का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि बाबा नीम करोली के दरबार से कोई भी भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने साझा किया वीडियो
जनपद नैनीताल में स्थित श्री कैंची धाम परम पूज्य बाबा नीब करौरी महाराज जी की पावन तपोस्थली और लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। पहाड़ों की शांत वादियों में बसा यह दिव्य धाम आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव कराता है।
अपने नैनीताल आगमन पर बाबा नीब… pic.twitter.com/DgQSqPrQ0q
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 1, 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कैंची धाम का एक मनमोहक वीडियो साझा करते हुए इसकी भव्यता और दिव्यता का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह धाम आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनूठा अहसास कराता है। नैनीताल आने वाले हर पर्यटक और श्रद्धालु को इस पवित्र धाम के दर्शन जरूर करने चाहिए।
कैंची के आकार की घाटी में बसा है धाम
स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, यह आश्रम दो पहाड़ियों के बीच सड़क के घुमावदार मोड़ों यानी कैंची के आकार की घाटी में स्थित है, जिस वजह से इसका नाम ‘कैंची धाम’ पड़ा। इस प्रसिद्ध आश्रम की स्थापना 1960 के दशक यानी वर्ष 1964 में बाबा नीम करोली द्वारा की गई थी। 15 जून 1964 को यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन हुआ था, जहां मुख्य रूप से संकटमोचन हनुमान जी का भव्य मंदिर स्थापित है।
घने जंगल से कैसे बना आध्यात्मिक केंद्र?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक समय में यह पूरा क्षेत्र एक घना जंगल हुआ करता था, जहां साधु-संत साधना किया करते थे। संत सोमवारी बाबा और प्रेमी बाबा ने यहां लंबे समय तक तपस्या की थी। बाद में जब बाबा नीम करोली ने इस स्थान पर आकर दिव्य ऊर्जा महसूस की, तो स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान की गई भूमि पर इस आश्रम का निर्माण करवाया गया। आज यहां की अलौकिक शांत हवा और आध्यात्मिक वातावरण हर उस व्यक्ति को अपनी ओर खींचता है, जो दुनियादारी के शोरगुल से दूर मानसिक शांति की तलाश में रहता है।

कैंची के आकार की घाटी में बसा है धाम


