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एसिड अटैक पीड़ित को मिलेंगे 15 लाख रुपये, लिंग के आधार पर मुआवजे में नहीं होगा भेदभाव

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने तेजाब हमले (एसिड अटैक) के एक मामले में ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पीड़ित युवक राहुल कुमार को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उसे पूर्व में मिले तीन लाख रुपये

हाईकोर्ट
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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने तेजाब हमले (एसिड अटैक) के एक मामले में ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पीड़ित युवक राहुल कुमार को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उसे पूर्व में मिले तीन लाख रुपये के मुआवजे के अलावा 15 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को पीड़ित राहुल के समुचित, बेहतर और निरंतर मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी कड़ा आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राहुल कुमार द्वारा दायर की गई अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। अदालत ने अपने फैसले में एक बेहद जरूरी कानूनी और सामाजिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि तेजाब हमला किसी लिंग विशेष (सिर्फ महिलाओं) के खिलाफ होने वाला अपराध नहीं है। मुआवजा देने के मामले में केवल पुरुष होने के आधार पर भेदभाव करना पीड़ित के मानवाधिकारों और न्याय के सिद्धांतों के साथ सरासर अन्याय होगा।

पीड़ा दोनों के लिए समान, तो मुआवजा अलग क्यों?

खंडपीठ ने राज्य सरकार की वर्तमान अधिसूचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेजाब हमले के पीड़ितों को मिलने वाली राहत राशि में महिला या पुरुष के आधार पर अंतर करना पूरी तरह से अनुचित है। अदालत ने जोर देकर कहा कि तेजाब फेंकने की वजह से होने वाली असहनीय शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक पीड़ा एक पुरुष और महिला दोनों के लिए समान रूप से गंभीर और विनाशकारी होती है। इसलिए, सरकार की राहत और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) की नीतियों में समानता का सिद्धांत हर हाल में लागू होना चाहिए।

एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दायर की थी अपील

अदालत को सुनवाई के दौरान अवगत कराया गया कि इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राहुल कुमार को महज तीन लाख रुपये मुआवजा देने और केवल आदेश की तारीख तक ही इलाज का खर्च उठाने का निर्देश दिया था। राहुल ने इस राहत को नाकाफी और भविष्य के इलाज के लिए अपर्याप्त बताते हुए खंडपीठ में गुहार लगाई थी।

याचिका में झारखंड के भीतर तेजाब की खुलेआम खरीद-बिक्री को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि राज्य में एसिड की अवैध बिक्री पर नियंत्रण के लिए प्रभावी नियमावली और मजबूत प्रशासनिक निगरानी तंत्र का अभाव है, जिसके कारण ऐसे अपराध बेखौफ अंजाम दिए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए झारखंड में भी तेजाब की बिक्री पर तत्काल कड़े नियम लागू करने की मांग की, जिसे कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है।

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