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Home»Adda More..»बच्चों में मीठे ड्रिंक्स की आदत बढ़ा रही है गंभीर बीमारियों का खतरा
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बच्चों में मीठे ड्रिंक्स की आदत बढ़ा रही है गंभीर बीमारियों का खतरा

एक नए शोध के अनुसार, बचपन में सोडा और पैक्ड जूस जैसे मीठे पेय पदार्थों के नियमित सेवन से भविष्य में मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का गंभीर खतरा हो सकता है।
By Samsul HaqueJuly 1, 20264 Mins Read
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बच्चों में मीठे ड्रिंक्स की आदत
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Health Desk: बचपन में विकसित होने वाली खान-पान की आदतें इंसान के पूरे जीवनकाल के स्वास्थ्य को तय करती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में मीठे ड्रिंक्स की आदत भविष्य में उनके लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रही है। हाल ही में सामने आए शोधकर्ताओं के निष्कर्षों के मुताबिक, बचपन में शर्करा युक्त या मीठे पेय पदार्थों का नियमित सेवन आगे चलकर मोटापा, उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), मधुमेह (डायबिटीज) और हृदय रोग जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं की मुख्य वजह बन सकता है।

Read more: पेरेंटिंग गाइड: बच्चों में कैल्शियम की कमी तो नहीं? इन 5 संकेतों से तुरंत पहचानें

वैज्ञानिकों ने इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए एक व्यापक अध्ययन किया है। इस शोध के दौरान विशेषज्ञों ने 85 अलग-अलग अध्ययनों का गहन विश्लेषण किया। इस पूरी शोध प्रक्रिया में बच्चों और वयस्कों को मिलाकर कुल 5.4 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों को शामिल किया गया था, जिसके बाद यह चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।

वजन बढ़ने और मोटापे से सीधा संबंध

इस विस्तृत अध्ययन में यह साफ तौर पर देखा गया कि जिन बच्चों ने अपने दैनिक आहार में मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम किया, उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI) में अन्य बच्चों की तुलना में काफी कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके विपरीत, शोध में शामिल जिन वयस्कों ने अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या से शर्करा युक्त ड्रिंक्स को पूरी तरह हटा दिया, उनके वजन में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। वहीं, जो लोग लगातार इनका सेवन करते रहे, उनका वजन लगातार बढ़ता चला गया।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकाला है कि बच्चों में मीठे ड्रिंक्स की आदत और वयस्कों द्वारा इसका अत्यधिक सेवन सीधे तौर पर अनियंत्रित वजन बढ़ने से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन पेय पदार्थों के उपभोग को कम करना अब वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

पैक्ड फ्रूट जूस और सोडा सेहत के लिए दुश्मन

यह नया वैज्ञानिक निष्कर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञों की उन पुरानी चेतावनियों की भी पुष्टि करता है, जिनमें लगातार कहा जाता रहा है कि चीनी युक्त ड्रिंक्स ही मोटापा, टाइप-2 मधुमेह और दिल की बीमारियों के सबसे बड़े कारकों में से एक हैं। आजकल बाजार में मिलने वाले सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स और पैक्ड फलों के जूस बच्चों को केवल अतिरिक्त कैलोरी देते हैं। इससे शरीर का वजन तेजी से बढ़ता है और मोटापा पैर पसारने लगता है। यही मोटापा आगे चलकर कम उम्र में ही हाइपरटेंशन और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का आधार बनता है।

आम तौर पर कई माता-पिता पैक्ड फ्रूट जूस को स्वास्थ्यवर्धक मानकर बच्चों को देते हैं, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है। इन डिब्बाबंद जूसों में न केवल भारी मात्रा में अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है, बल्कि इनमें से फलों का प्राकृतिक फाइबर भी पूरी तरह गायब होता है। लगातार इतनी अधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने से शरीर की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं, जिससे चयापचय (मेटाबॉलिज्म) संबंधी विकारों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, जो बच्चे अधिक मीठे ड्रिंक्स पीते हैं, वे अक्सर जरूरी पौष्टिक भोजन से दूरी बना लेते हैं, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जरूरी सलाह

चिकित्सकों और विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता को बच्चों की जीवनशैली में सुधार करना होगा। बच्चों के लिए प्यास बुझाने का मुख्य माध्यम केवल साफ पानी को ही बनाया जाना चाहिए। बाजार के पैक्ड जूस की जगह बच्चों को सीधे साबुत फल खाने की आदत डालें ताकि उन्हें सही पोषण और फाइबर मिल सके। इसके साथ ही, बिना चीनी वाला दूध नियमित रूप से बच्चों के दैनिक आहार में शामिल करें। सोडा या मीठे पेय पदार्थों का सेवन पूरी तरह बंद करें या बेहद सीमित अवसरों तक ही सीमित रखें।

Read more: Digital Parenting Tips: डिजिटल युग में बच्चों को उम्र के अनुसार कैसे दें सही संस्कार?

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