शादी का कार्ड छपवाते समय इन वास्तु नियमों का रखें खास ध्यान

Spiritual Desk: सनातन धर्म में शादी-ब्याह को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। यही वजह है कि विवाह से जुड़ी हर छोटी-बड़ी रस्म के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है। वर-वधु का वैवाहिक जीवन सुखमय और खुशहाल बीते, इसके लिए बकायदा कुंडली का

Spiritual Desk: सनातन धर्म में शादी-ब्याह को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। यही वजह है कि विवाह से जुड़ी हर छोटी-बड़ी रस्म के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है। वर-वधु का वैवाहिक जीवन सुखमय और खुशहाल बीते, इसके लिए बकायदा कुंडली का मिलान भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जितना जरूरी शुभ मुहूर्त और कुंडली मिलान है, उतना ही जरूरी विवाह का निमंत्रण पत्र भी है? अक्सर लोग शादी का कार्ड छपवाते समय केवल अपनी पसंद या लेटेस्ट ट्रेंड को देखते हैं। ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, शादी का कार्ड छपवाते समय कुछ बेहद जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि जीवन में कुछ भी अनर्थ या अशुभ न हो।

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विवाह का कार्ड केवल एक सूचना पत्र नहीं होता, बल्कि यह मांगलिक कार्य की शुरुआत का प्रतीक है। इसलिए, शादी का कार्ड छपवाते समय भी वास्तु के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए, तो होने वाले दूल्हा-दुल्हन के भावी वैवाहिक जीवन में कई तरह की समस्याएं और रुकावटें उत्पन्न हो सकती हैं।

कार्ड का आकार और शुभ प्रतीक

जब भी आप विवाह का निमंत्रण पत्र तैयार करवाएं, तो उसमें सनातन परंपरा के शुभ प्रतीकों जैसे- स्वास्तिक, नारियल, मंगल कलश और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का चित्र अवश्य शामिल करें। इसके अलावा, आप प्रेम के प्रतीक भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की सुंदर छवि भी कार्ड पर छपवा सकते हैं।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, शादी के कार्ड का आकार हमेशा चौकोर (Square) ही रखना चाहिए। शास्त्रों में अन्य किसी भी प्रकार के डिजाइन को शुभ नहीं माना गया है। आजकल लोग आधुनिक दिखने की होड़ में आयताकार, गोलाकार या अंडाकार (Oval) कार्ड भी बनवा लेते हैं, लेकिन वास्तु के दृष्टिकोण से ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है।

कैसा होना चाहिए शादी के कार्ड का रंग?

आजकल बाजार में तरह-तरह के रंगों वाले वेडिंग कार्ड उपलब्ध हैं। लोग अपनी रुचि के हिसाब से मैरून, लाल, पीला, नारंगी, नीला या ऑफ-व्हाइट रंगों के कार्ड चुनते हैं। कुछ लोग तो ट्रेंडी दिखने के चक्कर में काले रंग का कार्ड भी पसंद कर लेते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है। वास्तु के अनुसार, विवाह के लिए सबसे उत्तम और पवित्र रंग लाल, पीला, सफेद और केसरी माने गए हैं। भूलकर भी काले रंग का शादी कार्ड कभी नहीं बनवाना चाहिए, क्योंकि काला रंग मांगलिक कार्यों में नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

शादी के कार्ड पर कौन सा मंत्र लिखवाएं?

विवाह के निमंत्रण पत्र पर हमेशा भगवान गणेश से संबंधित वंदना या मंत्र जरूर लिखवाना चाहिए। ऐसा करना कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए बेहद शुभ और जरूरी होता है। इसके साथ ही, हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माने जाने वाले इस मंत्र को भी कार्ड पर स्थान दें:

“मंगलम भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ ध्वजा, मंगलम पुंडरीकाक्ष, मंगलाय तनो हरि”

विवाह जैसे बड़े मांगलिक और पवित्र कार्य में इस मंत्र को कार्ड पर लिखवाने अथवा इसका श्रद्धापूर्वक उच्चारण करने से विवाह निर्विघ्न संपन्न होता है और शादी में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

बचे हुए कार्ड्स का क्या करें?

अक्सर देखा जाता है कि लोग अंदाजा न मिलने के कारण जरूरत से ज्यादा शादी के कार्ड छपवा लेते हैं। सभी मेहमानों और रिश्तेदारों को आमंत्रित करने के बाद भी यदि घर में कार्ड बच जाते हैं, तो लोग उन्हें बेकार समझकर कहीं भी रख देते हैं। ध्यान रखें कि इन कार्ड्स पर देवी-देवताओं के चित्र और पवित्र मंत्र लिखे होते हैं, इसलिए इन्हें कभी भी कूड़े में फाड़कर फेंकने की भूल न करें। ऐसा करने से देवी-देवताओं का अपमान होता है और घर में वास्तु दोष लग सकता है।

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