Health Adda: शरीर की समुचित साफ-सफाई न होने और अनियमित जीवनशैली के चलते त्वचा संबंधी कई गंभीर संक्रमण पनपने लगते हैं। चर्म रोग न केवल असहनीय शारीरिक पीड़ा और जलन का कारण बनते हैं, बल्कि पीड़ित व्यक्ति को भारी मानसिक तनाव और सामाजिक असहजता का सामना भी करना पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार, दूषित खान-पान, पेट में लंबे समय तक कीड़े (कृमि) बने रहने और उनके विषाक्त तत्वों के रक्त में अवशोषित होने से खून अशुद्ध हो जाता है। यही दूषित रक्त त्वचा पर दाद, खाज, खुजली, फुंसियों और एग्जिमा के रूप में बाहर निकलता है।
दाद और संक्रामक खुजली की पहचान
चर्म रोगों में दाद और खुजली सबसे आम लेकिन कष्टदायक समस्याएं हैं। दाद होने पर त्वचा पर गोल चकत्ते उभर आते हैं और लगातार तीव्र खुजली होती है। खुजलाने के बाद प्रभावित हिस्से में तेज जलन और बारीक दाने निकलते हैं। दूसरी ओर, खुजली (Scabies) में पूरे शरीर या उंगलियों के पोरों के बीच सफेद रंग के छोटे-छोटे दाने बनते हैं। इन दानों को फोड़ने पर पहले पानी जैसा तरल और पकने पर गाढ़ा मवाद निकलता है। यह एक संक्रामक रोग है, जो पीड़ित व्यक्ति का तौलिया, बिस्तर, चादर इस्तेमाल करने या सीधे हाथ मिलाने से भी अन्य लोगों में फैल सकता है।
10 दिन में असरदार घरेलू मरहम
दाद, खाज, खुजली, अकौता और एग्जिमा (अपरस) के निवारण के लिए आयुर्वेद में एक विशेष लेप का उल्लेख मिलता है। इसे तैयार करने के लिए शुद्ध गंधक 10 ग्राम, शुद्ध पारा 3 ग्राम, मस्टर 3 ग्राम, तूतिया 3 ग्राम, कबीला 15 ग्राम और रालकामा 15 ग्राम को बारीक पीसकर अच्छी तरह मिला लें और एक कांच की शीशी में सुरक्षित रख लें। दाद की समस्या में इसे मिट्टी के तेल (केरोसीन) में मिलाकर प्रभावित जगह पर लगाएं। सामान्य खाज-खुजली में इसे सरसों के तेल के साथ सुबह-शाम लगाएं, जबकि गंभीर एग्जिमा में नीम के तेल के साथ मिलाकर लगाने से महज 10 दिनों में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
रक्तशोधक चर्म रोग नाशक अर्क
त्वचा रोगों को जड़ से मिटाने के लिए बाहरी लेप के साथ-साथ आंतरिक रूप से रक्त की शुद्धि आवश्यक है। इसके लिए एक शक्तिशाली घरेलू अर्क तैयार किया जा सकता है। शुद्ध आंवलासार गंधक, ब्रह्मदण्डी, स्वर्णछीरी की जड़, भृंगराज का पंचांग, नीम के ताजे पत्ते, बाबची और पीपल की छाल—प्रत्येक को 100-100 ग्राम की मात्रा में लें। इसमें 10 ग्राम छोटी इलायची और जौ मिलाकर 3 लीटर पानी में रातभर भिगो दें। सुबह इसका काढ़ा या अर्क छान लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट 10 ग्राम अर्क में थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से खून पूरी तरह साफ होता है, जिससे चेहरे की झाइयां, मुहांसे, आंखों के नीचे का कालापन और पुराने चर्म रोग पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।




