Saharanpur, UP: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय (कलेक्ट्रेट) परिसर में बनी एक अवैध मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर अपील को जिला न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह सख्त कार्रवाई अमल में लाई गई। ध्वस्तीकरण के दौरान मौके पर एसडीएम (उप-जिलाधिकारी) और नगर मजिस्ट्रेट के साथ भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा, जिसकी निगरानी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई। कलेक्ट्रेट जैसे अति संवेदनशील और गोपनीय प्रशासनिक क्षेत्र में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एहतियातन सभी मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे।
किराए के कमरे और डाकघर संचालन का लगा था आरोप
यह पूरा विवाद तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील स्थान पर इस मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से किया गया है। शिकायत में दावा किया गया कि इस स्थल का इस्तेमाल केवल इबादत के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक लाभ के लिए भी हो रहा था। मस्जिद परिसर में एक डाकघर संचालित था और बाहरी लोगों को कमरे किराए पर दिए जा रहे थे, जिसकी वसूली मस्जिद कमेटी करती थी। इन कमरों में बाहरी व्यक्तियों की चौबीसों घंटे आवाजाही से डीएम कार्यालय की सुरक्षा और प्रशासनिक गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे।
कोर्ट ने खारिज किया प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का दावा
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जेदार की बेदखली) अधिनियम (पीपी एक्ट) के तहत वाद दायर किया था। सुनवाई के बाद नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए बेदखली व ध्वस्तीकरण का आदेश सुनाया और कमेटी पर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने 22 जुलाई 2026 को जिला न्यायालय में चुनौती दी। हालांकि, जिला अदालत ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि इस संपत्ति पर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 (Places of Worship Act) लागू नहीं होता। अदालत ने अपील खारिज करते हुए परिसर को खाली कराने के निर्देश दिए, जिसके बाद सुबह बुलडोजर की मदद से ढांचे को गिरा दिया गया। फिलहाल इलाके में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की गश्त जारी है।




