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सरकारी दफ्तरों के चक्करों से कब मिलेगी मुक्ति, विधानसभा में उठा सवाल

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन जनसरोकारों के नाम रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने राज्य की उस दुखती रग पर हाथ रखा, जिससे हर आम नागरिक रोजाना जूझ रहा है, वह है सरकारी कार्यालयों में

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन जनसरोकारों के नाम रहा। सदन की कार्यवाही के दौरान कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने राज्य की उस दुखती रग पर हाथ रखा, जिससे हर आम नागरिक रोजाना जूझ रहा है, वह है सरकारी कार्यालयों में जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र और जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) में होने वाली अंतहीन देरी।

नियम ताक पर, जनता परेशान

विधायक नीरा यादव ने सदन को याद दिलाया कि नियमानुसार दाखिल-खारिज का काम 30 दिनों के भीतर और आय प्रमाण पत्र 15 दिनों के भीतर बन जाना चाहिए। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा, “जब समय सीमा पहले से तय है, तो आखिर क्यों हजारों लोग दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं? क्यों फाइलों पर धूल जम रही है?” उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह जमीन के मामलों के लिए कैंप लगते हैं, उसी तर्ज पर प्रमाण पत्रों के लिए भी नियमित शिविर लगाए जाएं ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

सरकार का जवाब : ‘देरी हुई तो नपेंगे अधिकारी’

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ‘सेवा गारंटी कानून 2011’ को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि हर अंचल कार्यालय (Block Office) समय सीमा के भीतर काम करने के लिए बाध्य है। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर देरी करता है, तो जनता उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है और सरकार ऐसे लापरवाह कर्मियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

छात्रों के भविष्य पर भी हुई चर्चा

शून्यकाल के दौरान शिक्षा और रोजगार के मुद्दे भी प्रमुखता से छाए रहे। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा में ‘कट-ऑफ डेट’ को लेकर हो रही असमंजस की स्थिति उठाई। उन्होंने आगाह किया कि अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो हजारों मेधावी छात्र ओवरएज (आयु सीमा पार) होने के कारण परीक्षा से वंचित रह जाएंगे।

वहीं, जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने बीएड की छात्राओं का पक्ष रखते हुए मानवीय मांग रखी। उन्होंने कहा कि कई आर्थिक रूप से कमजोर छात्राएं छात्रवृत्ति (Scholarship) के भरोसे अपनी पढ़ाई कर रही हैं। जब तक उन्हें सरकारी स्कॉलरशिप नहीं मिल जाती, तब तक कॉलेजों को फीस के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए। कुल मिलाकर, सत्र के तीसरे दिन विधायकों ने ब्लॉक से लेकर आयोग तक फैली अव्यवस्थाओं को उजागर कर सरकार को आईना दिखाने का काम किया।

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