New Delhi: शिक्षक दिवस के खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित 48 स्कूल शिक्षकों से आत्मीय मुलाकात की। प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस विशेष संवाद कार्यक्रम में पीएम मोदी ने शिक्षकों के साथ आधुनिक शिक्षा, बच्चों की बदलती दिनचर्या, बढ़ते स्क्रीन टाइम, खेलकूद और शैक्षणिक संस्थानों के नियमों से जुड़े तमाम विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के जमीनी अनुभव सुने और उनसे महत्वपूर्ण सुझाव भी मांगे। बातचीत का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है।
‘कुशल वक्ता बनने के लिए क्या करूं?’ शिक्षिका से मांगा सुझाव
#TeachersDay is about appreciating the strong contribution of teachers to our society. It is also a day to pay homage to Dr. S. Radhakrishnan.
Here is what happened when the National Teachers’ Awards winners were invited to 7, LKM yesterday…. pic.twitter.com/LtXTvHiQoQ
— Narendra Modi (@narendramodi) September 5, 2026
शिक्षकों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को लेकर एक शिक्षिका से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि यदि वह उनके विद्यार्थी होते और एक बेहतर वक्ता बनना चाहते, तो वह उन्हें क्या सलाह देतीं? इस पर शिक्षिका ने जवाब दिया कि सबसे पहले व्यक्ति में आत्मविश्वास होना जरूरी है, जो निरंतर और अधिक अभ्यास से ही निखरता है। बातचीत के दौरान शिक्षिका ने सहजता से यह भी साझा किया कि प्रधानमंत्री के विराट व्यक्तित्व को देखकर वह खुद शुरुआत में थोड़ी घबरा गई थीं।
स्क्रीन टाइम को बताया एक तरह की लत
बच्चों में मोबाइल और गैजेट्स के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम अब बच्चों के लिए एक लत बनता जा रहा है। उन्होंने इसका व्यावहारिक समाधान सुझाते हुए कहा कि यदि बच्चों को वास्तविक मैदानी खेलों में रुचि लेने के लिए प्रेरित किया जाए, तो वे इस डिजिटल लत से आसानी से बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका आशय वीडियो गेम से नहीं, बल्कि खुले मैदान में खेले जाने वाले पारंपरिक खेलों से है।
नियम लागू करने से पहले बच्चों के मनोविज्ञान का रखें ध्यान
ड्रेस कोड और स्कूलों में कड़े नियम थोपने के मामलों पर चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि कई बार नियमों को बिना स्पष्ट समझाइश के लागू कर दिया जाता है। शिक्षकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे फैसलों का बच्चों के कोमल मन और व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने वाराणसी में ब्रेस्ट कैंसर के खिलाफ चलाए गए जागरूकता अभियान और एक दिन में सर्वाधिक स्क्रीनिंग के रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि अब महिलाएं संकोच छोड़कर जांच के लिए आगे आ रही हैं। उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों के मार्गदर्शन को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया।





