पुण्यतिथि संस्मरण (जेआरडी टाटा)
रांची/जमशेदपुर: 29 जुलाई 1904 को पेरिस में जन्मे जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जेआरडी टाटा) केवल एक सफल व्यवसायी नहीं थे, बल्कि आधुनिक भारत के औद्योगिक ढांचे और नागरिक उड्डयन क्षेत्र के असली शिल्पकार थे। जेआरडी टाटा एक ऐसे दूरदर्शी कप्तान थे, जिन्होंने नैतिकता, जनकल्याण और नवाचार को व्यापार के केंद्र में रखा। उनकी दूरदर्शिता का ही नतीजा था कि जिस टाटा समूह में कभी केवल 14 कंपनियां हुआ करती थीं, उनके 50 से अधिक वर्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में वह बढ़कर 100 से ज्यादा कंपनियों का एक विशाल वैश्विक औद्योगिक साम्राज्य बन गया।
झारखंड (तत्कालीन अविभाजित बिहार) की माटी और विशेष रूप से जमशेदपुर से जेआरडी टाटा का जुड़ाव बेहद आत्मीय और गहरा रहा। संस्थापक जमशेदजी टाटा के सपनों को धरातल पर उतारते हुए जेआरडी टाटा ने जमशेदपुर को केवल एक ‘स्टील सिटी’ ही नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति और आधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस भारत के सबसे सुनियोजित मॉडल शहरों में से एक बनाया।
भारतीय नागरिक उड्डयन के जनक (Father of Indian Aviation)
जेआरडी टाटा के सपनों की कोई सीमा नहीं थी और उन्हें बचपन से ही आसमान में उड़ने का जुनून था। वर्ष 1929 में उन्होंने भारत का सबसे पहला कमर्शियल पायलट लाइसेंस (Pilot License) हासिल किया। इसके बाद 15 अक्टूबर 1932 को उन्होंने भारत की पहली व्यावसायिक एयरलाइन ‘टाटा एयरलाइंस’ की नींव रखी और कराची से मुंबई की ऐतिहासिक उड़ानों को स्वयं उड़ाया।
यही टाटा एयरलाइंस आगे चलकर भारत की राष्ट्रीय विमान सेवा ‘एयर इंडिया’ के रूप में जानी गई। वर्ष 1953 में सरकार द्वारा एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किए जाने के बाद भी, देशहित को सर्वोपरि रखते हुए जेआरडी टाटा ने बिना किसी कड़वाहट या शिकन के वर्षों तक चेयरमैन के रूप में इसकी निस्वार्थ सेवा की।
जमशेदपुर और झारखंड के विकास में ऐतिहासिक योगदान
झारखंड के औद्योगिक और सामाजिक विकास में जेआरडी टाटा का योगदान अतुलनीय है:
टाटा स्टील और टाटा मोटर्स का विस्तार: जमशेदपुर स्थित ‘टाटा स्टील’ और ‘टेलको’ (अब टाटा मोटर्स) को वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। उन्होंने झारखंड के खान-खदान और खनिज संपदा का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे के निर्माण में किया।
खेलों की राजधानी बना जमशेदपुर: जेआरडी टाटा का मानना था कि किसी शहर और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए खेल अनिवार्य हैं। उनके मार्गदर्शन में जमशेदपुर में विश्वस्तरीय जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, ‘टाटा फुटबॉल अकादमी’ (TFA) और ‘टाटा तीरंदाजी अकादमी’ की स्थापना हुई। आज यही जमशेदपुर झारखंड की ‘स्पोर्ट्स कैपिटल’ के रूप में जाना जाता है।
नागरिक सुविधाएं और पर्यावरण: उन्होंने जमशेदपुर में जुबली पार्क, सिर दोराबजी टाटा पार्क और चिड़ियाघर का निर्माण कराया और कर्मचारियों के लिए बेहतरीन आवास, अस्पताल तथा शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था की।
मजदूर कल्याण, टीसीएस और कालजयी संस्थानों का निर्माण
जेआरडी टाटा का हमेशा से मानना था कि किसी भी औद्योगिक संस्थान की असली ताकत उसकी मशीनें नहीं, बल्कि उसके कर्मचारी होते हैं। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत में कर्मचारी कल्याण के वो मानक स्थापित किए, जिन्हें बाद में भारत सरकार ने भी अपने श्रम कानूनों के रूप में अपनाया:
मानव संसाधन (HR) क्रांति: काम के 8 घंटे की सीमा, सवेतन अवकाश (Paid Leave), प्रोविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसी क्रांतिकारी नीतियां देश में सबसे पहले टाटा समूह ने अपने कारखानों में लागू की थीं।
भविष्य की दिग्गज कंपनियों का बीजारोपण: उन्होंने टाटा मोटर्स (TELCO), टाटा केमिकल्स, टाटा साल्ट, टाइटन और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टीसीएस (TCS) की मजबूत नींव रखी।
वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च शिक्षा: जेआरडी टाटा ने राष्ट्र निर्माण को गति देने के लिए ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च’ (TIFR), ‘टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल’ और ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज’ (TISS) जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों की स्थापना की।
महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल
जेआरडी टाटा लिंग या जाति के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव के सख्त खिलाफ थे। एक बार जब टाटा मोटर्स (तत्कालीन टेलको, जमशेदपुर) के एक भर्ती विज्ञापन में लिखा गया कि “महिला उम्मीदवार आवेदन न करें”, तो देश की तत्कालीन युवा इंजीनियर सुधा मूर्ति (वर्तमान में राज्यसभा सांसद व इंफोसिस फाउंडेशन की पूर्व अध्यक्ष) ने जेआरडी टाटा को पोस्टकार्ड लिखकर इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया।
जेआरडी टाटा ने उस पत्र को गंभीरता से लिया, अपनी कंपनी की नीति में तुरंत सुधार किया और सुधा मूर्ति को इंटरव्यू के लिए बुलाकर टाटा मोटर्स जमशेदपुर के प्लांट में भारत की पहली महिला शॉप-फ्लोर इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया।
सादगी, नैतिकता और ‘भारत रत्न’ का सम्मान
अपार संपत्ति, प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रभाव के बावजूद जेआरडी टाटा अत्यंत विनम्र और सादगीपसंद इंसान थे। वे अक्सर धन के उपयोग पर कहा करते थे:
“पैसा खाद (Manure) की तरह है, जब आप इसे एक जगह जमा कर देते हैं तो इससे बदबू आने लगती है, लेकिन जब आप इसे पूरे समाज में फैला देते हैं तो यह नई फसलें, हरियाली और खुशहाली लाता है।”
उद्योग, समाज सेवा, उड्डयन और झारखंड सहित पूरे देश के उत्थान में उनके अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष 1992 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया। वे भारत रत्न प्राप्त करने वाले देश के पहले और एकमात्र उद्योगपति हैं। 29 नवंबर 1993 को जेआरडी टाटा का निधन हो गया, लेकिन उनका विजन, आदर्श और झारखंड की धरती से उनका जुड़ाव आज भी हर भारतीय और झारखंडवासी के लिए प्रेरणास्रोत है। हम झारखंडवासी और पब्लिक अड्डा की पूरी टीम की ओर से इस महान भारत रत्न को अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।




