Patna: बिहार के सीमांचल के चार जिलों में करीब 20 हजार महिलाओं ने बकरी पालन को संगठित कारोबार से जोड़कर अगस्त 2026 तक 15.49 करोड़ रुपये का संचयी कारोबार खड़ा किया है। अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज की जीविका दीदियां सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के जरिए बकरी पालन और मांस उत्पादन से जुड़ी हैं। कंपनी की स्थापना दिसंबर 2020 में हुई थी और सितंबर 2021 से व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की गईं।
बकरी पालन से बढ़ा महिलाओं का कारोबार
अगस्त 2026 तक कंपनी से 19,956 शेयरधारक जुड़ चुके हैं और कुल शेयर पूंजी 99.78 लाख रुपये हो गई है। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर भी लगातार बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में यह 25.50 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 530.63 लाख रुपये यानी करीब 5.31 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी से जुड़े किसानों को बकरी पालन और मांस उत्पादन के एवज में किया जाने वाला भुगतान भी बढ़ा है। 2021-22 में जहां 11.47 लाख रुपये का भुगतान हुआ था, वहीं 2025-26 में यह राशि बढ़कर 146.70 लाख रुपये हो गई। अगस्त 2026 तक उत्पादक महिलाओं को कुल 5.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
गांवों तक पहुंची पशु स्वास्थ्य सेवा
कंपनी ने बकरियों की खरीद-बिक्री के लिए लाइव बॉडीवेट के आधार पर मूल्य निर्धारण की व्यवस्था अपनाई है। प्रखंड स्तर पर खरीद-बिक्री के लिए 44 डेमो सह कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। गांवों में पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 700 से अधिक प्रशिक्षित पशु सखियां काम कर रही हैं।
वर्ष 2025-26 में 2.15 लाख से अधिक डीवॉर्मिंग और 1.95 लाख से ज्यादा टीकाकरण सेवाएं दी गईं। वहीं, सीमांचल जीविका मीट आउटलेट के जरिए अगस्त 2026 तक 14,566 किलोग्राम मांस की बिक्री हुई, जिससे 1.03 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार दर्ज किया गया।
मंत्री ने बताया सामूहिक उद्यमिता का उदाहरण
ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सीमांचल में 20 हजार महिलाओं की एकजुटता से बकरी पालन के जरिए 15 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, जीविका ने बकरी पालन को संगठित बाजार और वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाने की दिशा में काम किया है। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग इस मॉडल को राज्य के दूसरे हिस्सों में भी आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा।





