कोलकाता: भारतीय जनसंघ के संस्थापक और महान राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों को संजोने की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने हुगली जिले के बलागढ़ स्थित जिराट गांव में बने उनके पौराणिक पैतृक आवास को 1 करोड़ 25 लाख 99 हजार 822 रुपये में खरीद लिया है।
इस ऐतिहासिक संपत्ति का आधिकारिक पंजीकरण 3 जुलाई को कोलकाता स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में संपन्न हुआ। इसके साथ ही तय राशि बैंक ट्रांसफर के जरिए डॉ. मुखर्जी के उत्तराधिकारियों के खातों में भेज दी गई है। इस खरीद प्रक्रिया के बाद अब यह निजी संपत्ति पूरी तरह से राज्य सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग के प्रशासनिक स्वामित्व में आ गई है।
कैबिनेट मंजूरी से रजिस्ट्री तक की त्वरित कार्रवाई
इस धरोहर को सरकारी संरक्षण में लेने का निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की 3 जून की बैठक में लिया गया था। इसके बाद प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाते हुए 29 जून को हुगली के विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी और जिला प्रत्यक्ष भूमि खरीद समिति की अहम बैठक हुई। प्रशासनिक तत्परता का आलम यह रहा कि बैठक के महज तीन दिनों के भीतर ही खरीद-बिक्री की सभी औपचारिकताएं और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
200 करोड़ का बजट और भव्य स्मारक की योजना
स्थानीय विधायक व राज्य की स्वास्थ्य राज्यमंत्री सुमना सरकार ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर का जीर्णोद्धार कर वहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय और पुस्तकालय बनाने का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे अब धरातल पर उतारा जा रहा है।
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बजट में 200 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। योजना के तहत:
125 फीट ऊंची प्रतिमा: परिसर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भव्य पूर्णकाय प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
सांस्कृतिक परिसर: पुराने भवन के जीर्णोद्धार के साथ-साथ वहां एक स्मृति पार्क, समृद्ध पुस्तकालय, संग्रहालय और अत्याधुनिक सभागार (ऑडिटोरियम) विकसित किया जाएगा।
क्षेत्र का सौंदर्यीकरण: पूरे जिराट क्षेत्र को एक प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ‘बंगाल के बाघ’ कहे जाने वाले सर आशुतोष मुखर्जी (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता) के नाम पर जिराट में पहले से विद्यालय और पुस्तकालय मौजूद हैं। अब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक आवास का कायाकल्प होने से यह ऐतिहासिक गांव देश-दुनिया के शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगा।




