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दिल्ली में डेरा, झारखंड में सियासी उबाल- हेमंत सोरेन क्या पलटेंगे खेल?

Ranchi News: रांची की सियासत इन दिनों असामान्य रूप से गर्म है। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार ने झारखंड तक असर पहुंचा दिया है। वजह साफ है- झारखंड मुक्ति मोर्चा को बिहार चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली, और यह बात

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Ranchi News: रांची की सियासत इन दिनों असामान्य रूप से गर्म है। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार ने झारखंड तक असर पहुंचा दिया है। वजह साफ है- झारखंड मुक्ति मोर्चा को बिहार चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली, और यह बात पार्टी को भीतर तक चुभ गई है। राजनीतिक गलियारे खुलकर कह रहे हैं कि यही नाराजगी अब झारखंड की सरकार पर असर डाल सकती है।

हेमंत–कल्पना सोरेन का दिल्ली में डेरा, अटकलों को मिली हवा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली में रुके हुए हैं। खुलकर कोई बयान नहीं आया, लेकिन इतने शांत माहौल में भी दिल्ली के बंद दरवाज़ों के पीछे चल रही बैठकों ने पूरे झारखंड को चर्चा में डाल दिया है। खबरें लगातार आ रही हैं कि जेएमएम भाजपा के साथ जाने पर विचार कर रही है।

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अगर ऐसा हुआ, तो झारखंड का राजनैतिक गणित रातों-रात बदल जाएगा।
जेएमएम के 34 और भाजपा के 20 विधायक जोड़ दिए जाएं, तो आंकड़ा 54 तक पहुंच जाता है- जो बहुमत के 42 से बहुत ऊपर है। अगर एनडीए के अन्य दल भी साथ आएं, तो कुल सीटें 57 तक पहुंच रही हैं। इतना मजबूत बहुमत मौजूदा सरकार का गिरना तय कर देगा।

महागठबंधन की मुश्किलें और जेएमएम की नाराज़गी

साल 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने बेहद मज़बूत प्रदर्शन किया था- 81 में से 56 सीटें जीतीं। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी जेएमएम की रही थी। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बिहार में सीट न देना जेएमएम के लिए बड़ा अपमान जैसा था। यही वजह है कि पार्टी अब अपनी भविष्य की सुरक्षा के लिए नए विकल्प खोज रही है।

प्रवक्ता का बयान और जनता में उठते सवाल

जेएमएम के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- “यह सिर्फ अफवाह है, हम महागठबंधन में थे, हैं और रहेंगे।” लेकिन समस्या यह है कि राजनीतिक बयान अपनी जगह होते हैं, और दिल्ली में लगातार बनी सोरेन दंपती की मौजूदगी अपनी जगह।

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रांची की चाय दुकानों में भी यही सवाल चल रहा है- क्या हेमंत सोरेन नया गठबंधन चुनकर सबसे बड़ा सियासी पलटवार करने वाले हैं? या फिर यह सिर्फ दबाव की राजनीति है?

आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होगी

राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि अगर यह उलटफेर हुआ, तो झारखंड में पिछले दस साल की सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल होगी। अभी सबकी निगाहें सिर्फ एक बात पर टिकी हैं- हेमंत सोरेन किस तरफ झुकते हैं? पुरानी दोस्ती या नया समीकरण?

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