Patna: मां जानकी की जन्मभूमि पुनौराधाम के कायाकल्प की योजना अब जमीन पर तेजी से आकार लेने लगी है। भव्य मंदिर के निर्माण के साथ पूरे धाम को धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। मंदिर के पिलर, फाउंडेशन और परकोटा निर्माण का काम शुरू हो चुका है। विभागीय योजना के अनुसार, भव्य मंदिर को 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना प्रभावित न हो, इसके लिए परिसर में नवनिर्मित अस्थायी काष्ठ मंडप तैयार किया गया है। इसी मंडप में भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। निर्माण कार्य के साथ यहां धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी।
काष्ठ मंडप में जारी रहेगी पूजा-अर्चना
पर्यटन विभाग के अनुसार, मंदिर निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और नियमित पूजा-अर्चना में बाधा न आए, इसके लिए अस्थायी काष्ठ मंडप बनाया गया है। अगस्त 2026 में इस मंडप में भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। अब भव्य मंदिर के निर्माण के समानांतर इसी मंडप में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन की सुविधा मिलती रहेगी।
पिलर, फाउंडेशन और परकोटा का काम शुरू
पुनौराधाम विकास परियोजना में भव्य मंदिर के साथ उससे जुड़े विभिन्न भवनों का निर्माण भी प्रस्तावित है। विभागीय जानकारी के अनुसार, इन भवनों के पिलर निर्माण का काम चल रहा है। इसके साथ मंदिर परिसर के परकोटा यानी चारदीवारी और फाउंडेशन तैयार करने का काम भी शुरू हो गया है। निर्माण स्थल तक आवागमन और निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए पहुंच पथ के रूप में मिट्टी सड़क तैयार की जा रही है।
मिट्टी परीक्षण और पर्यावरणीय स्वीकृति पूरी
परियोजना के निर्माण से पहले जरूरी तकनीकी प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं। विभाग के अनुसार, मिट्टी परीक्षण और सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है। परियोजना से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाओं के साथ पर्यावरणीय स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है। निर्माण क्षेत्र में मौजूद कुछ परिसंपत्तियों के ध्वस्तीकरण का काम भी पूरा किया जा चुका है, जिससे प्रस्तावित निर्माण के लिए स्थल तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
मंदिर के साथ पूरा परिसर होगा विकसित
पुनौराधाम का विकास सिर्फ भव्य मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा। योजना में मंदिर के साथ परकोटा, यज्ञ मंडप, अनुष्ठान मंडप, पीठाधीश्वर निवास, म्यूजियम, ऑडिटोरियम और महिला हाट विकसित करने का प्रावधान है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र, प्रेक्षागृह, वीआईपी एवं संत निवास समेत अन्य जरूरी सुविधाएं भी विकसित करने की योजना है।
जन्मकुंड और गर्भगृह पर भी फोकस
मां जानकी की जन्मभूमि से जुड़े जन्मकुंड और गर्भगृह के विकास को भी परियोजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। विभागीय योजना के अनुसार मंदिर परिसर के गर्भगृह और कुंड का विकास किया जाएगा। इसके साथ जन्मकुंड परिसर के उद्धार, सुरक्षा व्यवस्था और पूरे क्षेत्र को मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सीतामढ़ी के धार्मिक स्थलों को जोड़ने की तैयारी
पुनौराधाम को व्यापक धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए मां सीता से जुड़े अन्य स्थलों को भी इससे जोड़ने की योजना है। इससे पुनौराधाम आने वाले श्रद्धालु सीतामढ़ी और आसपास के धार्मिक स्थलों की यात्रा भी कर सकेंगे। प्रस्तावित सीतापुरम और सैटेलाइट टाउनशिप जैसे विकास घटकों को भी समग्र योजना में शामिल किया गया है।
मिथिला की कला-संस्कृति को मिलेगा मंच
पुनौराधाम के विकास में धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर है। परिसर में बज्जिका और सिक्की कला जैसी स्थानीय कला परंपराओं को प्रदर्शित करने और पर्यटकों से जोड़ने की पहल की जा रही है। प्रस्तावित महिला हाट को स्थानीय शिल्प और उत्पादों के लिए मंच के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कला, शिल्प और आजीविका को जोड़ने का अवसर मिलेगा।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
पर्यटन विभाग के मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि पुनौराधाम मां जानकी की जन्मभूमि के रूप में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सीतामढ़ी में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से मिथिला की कला-संस्कृति और स्थानीय शिल्प को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ेंगे।



