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झारखंड कृषि निदेशालय में करोड़ों का घोटाला! भाकपा ने कृषि मंत्रालय से लगाई गुहार

काली सूची में दर्ज 14 कंपनियों को फिर बांटे गए करोड़ों के कार्यादेश, PMKSY योजना में धांधली का आरोप, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर मेहरबान झारखंड कृषि निदेशालय

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रांची: झारखंड के कृषि निदेशालय में सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं (PMKSY) के तहत करोड़ों रुपये के कथित घोटाले और गंभीर अनियमितताओं का मामला एक बार फिर गरमा गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने राज्य के कृषि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है।
CPI के राष्ट्रीय सचिव के. डी. सिंह और रांची जिला सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में कृषि मंत्रालय के डिप्टी कमिश्नर योगेश ए. रौंडल से मुलाकात कर एक स्मार पत्र सौंपा। पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 में गंभीर गड़बड़ियों के कारण जिन 14 सिंचाई उपकरण निर्माता कंपनियों को काली सूची (Blacklist) में डाला गया था, उन्हें केवल 30 दिनों के भीतर एक कथित तार्किक आदेश के जरिए फिर से राहत दे दी गई।

शर्तों का उल्लंघन और निर्देशों की अनदेखी

स्मार पत्र में कहा गया है कि इन 14 कंपनियों को राहत देने के लिए एक प्रमुख शर्त रखी गई थी। कंपनियों को किसानों के खेतों में लगे निम्न गुणवत्ता वाले ड्रिप व स्प्रिंकलर उपकरणों का बैच नंबर बदलकर प्लास्टिक इंस्टीट्यूट (CIPET) से पुन: जांच करानी थी और जांच रिपोर्ट कृषि निदेशक, रांची को सौंपनी थी। भाकपा नेताओं का आरोप है कि यह जांच रिपोर्ट आज तक समर्पित नहीं की गई है।
इसके बावजूद, तत्कालीन कृषि निदेशक द्वारा 18 मार्च 2024 को दिए गए निर्देशों की अवहेलना करते हुए इन कंपनियों के कार्यादेश (Work Order) बहाल कर दिए गए और उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान भी जारी कर दिया गया। तत्कालीन आदेश में हजारीबाग उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी (F.I.R.) दर्ज करने का भी निर्देश था, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

‘भारत ड्रिप इरीगेशन’ पर विशेष मेहरबानी का आरोप

पत्र में विशेष रूप से ‘भारत ड्रिप इरीगेशन एंड एग्रो’ का जिक्र करते हुए सवाल उठाया गया है कि काली सूची में नाम होने के बाद भी कृषि निदेशालय इस कंपनी पर मेहरबान क्यों है? आरोप है कि सबसे ज्यादा कार्यादेश और भुगतान इसी एजेंसी को किया जा रहा है। CPI ने इस कंपनी द्वारा पूरे राज्य में किए गए कार्यों की सूची सार्वजनिक करने और संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में जिलास्तरीय जांच समिति बनाने की मांग की है।

केंद्र से हस्तक्षेप की गुहार

भाकपा ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
  1. झारखंड सरकार को निर्देश देकर सभी 14 संदिग्ध कंपनियों के कार्यादेश और भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  2. पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (S.I.T.) का गठन किया जाए।
  3. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत जारी किए गए सरकारी अनुदान (Subsidy) की धांधली की वसूली पर विचार किया जाए।
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