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चाईबासा नो-एंट्री आंदोलन: पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव, शहर में अफरा-तफरी

Chaibasa News: चाईबासा में सड़क सुरक्षा की मांग पर भारी वाहनों के नो-एंट्री आंदोलन ने सोमवार देर रात तनावपूर्ण मोड़ ले लिया। तांबो चौक पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई तीखी भिड़ंत ने पूरे इलाके को हिला दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अचानक पथराव

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Chaibasa News: चाईबासा में सड़क सुरक्षा की मांग पर भारी वाहनों के नो-एंट्री आंदोलन ने सोमवार देर रात तनावपूर्ण मोड़ ले लिया। तांबो चौक पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई तीखी भिड़ंत ने पूरे इलाके को हिला दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस घटनाक्रम से अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

एसडीपीओ की गाड़ी पर हमला, ग्रामीणों का आरोप

क्षतिग्रस्त एसडीपीओ की गाड़ी।

प्रदर्शन के दौरान सदर एसडीपीओ बाहमन टूटी की स्कॉर्पियो गाड़ी को भी भीड़ ने निशाना बनाकर क्षतिग्रस्त कर दिया। ग्रामीण पिछले कई महीनों से एनएच-220 और चाईबासा बाईपास पर दिन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस रास्ते से स्कूल, कॉलेज और बाजार तक भारी वाहन गुजरने से हादसे बढ़ गए हैं और कई जानें जा चुकी हैं।

मंत्री के घर तक मार्च का प्रयास, धरना स्थल पर जीवन

सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण सड़क सुरक्षा की मांग लेकर परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा के घर की तरफ कूच करने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें तांबो चौक पर ही रोक दिया। नाकेबंदी के बाद ग्रामीण उस जगह पर बैठ गए, धरना शुरू किया, चूल्हा जलाकर खाना बनाया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से आंदोलन को जीवन दिया। शाम ढलते-ढलते मुख्य सड़क बंद कर दी गई और नारेबाजी शुरू रही।

झड़प, लाठीचार्ज और यातायात ठप

पत्थरबाजी का जबाब देते पुलिसकर्मी।

पुलिस ने देर रात जब धरना खत्म करवाने की कोशिश की, तो स्थिति बिगड़ी और भीड़ ने पथराव कर दिया। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिससे भीड़ तितर-बितर हुई और कुछ लोग हल्के घायल भी हुए। पूरी मुख्य सड़क पर यातायात कई घंटों तक ठप रहा, लेकिन देर रात पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पा लिया और यातायात बहाल किया।

प्रशासन की सख्ती और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

अधिकारियों ने बताया कि अब स्थिति सामान्य है, लेकिन एहतियातन इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि नो-एंट्री नियम सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, ग्रामीण नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन नहीं रुकेगा। उनका जोर है कि दिन में भारी वाहनों पर रोक लगाना जरूरी है ताकि जानमाल की सुरक्षा हो सके।

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