Patna: बिहार में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए गंगा और गंडक नदी पर सामुदायिक जेटी का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) पर 16 नए सामुदायिक जेटी के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, जबकि 10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू हो चुका है। इससे यात्रियों के साथ-साथ किसानों, मछुआरों और व्यापारियों के लिए सामान की आवाजाही आसान होगी।
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भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) की ओर से चिन्हित राष्ट्रीय जलमार्गों पर इन जेटी का निर्माण कराया जा रहा है। इनका उद्देश्य यात्रियों और सामान की सुरक्षित एवं सुगम आवाजाही के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। जेटी बनने से नावों और जहाजों पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने के साथ सामान की लोडिंग और अनलोडिंग भी आसान होगी। IWAI जेटी के निर्माण और दो साल तक सफल संचालन के बाद इन्हें इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (IWT), बिहार को हस्तांतरित करता है।
16 स्थानों पर जेटी निर्माण का रास्ता साफ
परिवहन विभाग के अनुसार, 17 स्थानों में से 16 स्थानों पर सामुदायिक जेटी के निर्माण के लिए जिलों से IWAI को एनओसी मिल चुका है। इनमें पटना के कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल सहित अन्य स्थान शामिल हैं। पटना के NIT के लिए अभी एनओसी प्राप्त नहीं हुआ है। वैशाली में कोनहराघाट और हाजीपुर, सारण में हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर तथा समस्तीपुर में पत्थरघाट और धरनीपट्टी पश्चिम में भी जेटी निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। बेगूसराय में सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट समेत तीन स्थानों पर जेटी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा वैशाली में दो स्थानों तथा भागलपुर और आरा में NW-1 पर जेटी निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू भी हो चुका है।
गंडक नदी पर भी दो जेटी प्रस्तावित
गंडक नदी यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-37 (NW-37) पर पश्चिम चंपारण में दो सामुदायिक जेटी का निर्माण प्रस्तावित है। चिन्हित स्थानों पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इनका एनओसी अभी प्राप्त नहीं हुआ है।
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11 जिलों में पहले से 21 जेटी मौजूद
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने बताया कि राज्य में NW-1 के किनारे 11 जिलों में पहले से 21 सामुदायिक जेटी मौजूद हैं। इनमें भोजपुर में खवासपुर और महुली घाट शामिल हैं। पटना में दीघा, नकटा दियारा, पानापुर, नासरीगंज और बाढ़ में पांच जेटी हैं। भागलपुर में तिनतंगा, सुल्तानगंज, कहलगांव और बटेश्वरनाथ में चार जेटी मौजूद हैं। वैशाली और कटिहार में दो-दो तथा बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया में एक-एक सामुदायिक जेटी है। इनमें कई जेटी स्टील और कई प्लास्टिक यानी एचडीपीई से निर्मित हैं।
किसानों और व्यापारियों को मिलेगा लाभ
सचिव राज कुमार के अनुसार, सामुदायिक जेटी नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। इनके जरिए स्थानीय उपज, माल और कार्गो की सस्ती ढुलाई संभव होगी। जल परिवहन पर्यावरण-अनुकूल होने के साथ सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में भी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार आने वाले दिनों में जल परिवहन का बड़ा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।





