Patna: राज्य के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को पटना स्थित बामेती सभागार में आयोजित वासंतिक (रबी) महाअभियान सह कार्यशाला को संबोधित करते हुए घोषणा की कि इस वर्ष बिहार में लगभग 48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि निर्धारित लक्ष्यों को धरातल पर उतारने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्यशाला में महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. वीरेंद्र यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
फसलवार निर्धारित लक्ष्य
पिछले वर्ष लगभग 42 लाख हेक्टेयर में वासंतिक फसलों की खेती हुई थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 48 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। इसके तहत विभिन्न फसलों के लिए निम्नलिखित लक्ष्य तय किए गए हैं:
गेहूं: लगभग 24 लाख हेक्टेयर
वासंतिक मक्का: 6 लाख हेक्टेयर
दलहन: 5 लाख हेक्टेयर
तिलहन: 4 लाख हेक्टेयर
आलू, सब्जी, मसाला व अन्य फसलें: 9 लाख हेक्टेयर
कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि इन लक्ष्यों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर खेतों में वास्तविक परिणाम के रूप में दिखाया जाए।
गुणवत्तापूर्ण बीज और जीरो टॉलरेंस नीति
कृषि मंत्री ने कहा कि खेती की सफलता की पहली शर्त गुणवत्तापूर्ण बीज है, और किसानों को समय पर प्रमाणित एवं उन्नत बीज उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि योजनाओं में भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। किसानों को बिहार कृषि मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों से बीज की उपलब्धता तथा योजनाओं की समय पर जानकारी दी जाए।
दलहन-तिलहन, प्राकृतिक खेती और पराली प्रबंधन
कार्यशाला में मसूर, चना और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील करते हुए जीरो टिलेज, मिट्टी की जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया, जिससे खेती की लागत कम हो और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहे। इसके साथ ही कृषि में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, एग्रीस्टैक के तहत फार्मर आईडी बनाने तथा कृषि यंत्रों व स्वरोजगार के अवसरों पर भी बल दिया गया।




