Patna: बिहार सरकार राज्य में स्वच्छ ऊर्जा और हरित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026’ लागू करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य को क्लीन एनर्जी और सतत आर्थिक विकास का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।
बड़े निवेश और उत्पादन का लक्ष्य
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने इस नीति की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत अगले पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किए जाएंगे:
– उत्पादन क्षमता: राज्य में प्रतिवर्ष 1 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
– भारी निवेश: इस नीति के जरिए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कुल 1,040.25 करोड़ रुपये की आकर्षक प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) दी जाएगी, जो अन्य राज्यों के मुकाबले काफी बेहतर है। इससे राज्य में लगभग 16,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश आने की उम्मीद है।
– रोजगार सृजन: इस पूरी प्रक्रिया से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 12,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
नीति की मुख्य विशेषताएं और पर्यावरण को लाभ
– कार्बन उत्सर्जन में कमी: इस नीति के प्रभावी होने से राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में कमी आएगी। यह भारत सरकार के उस ‘फाइव पॉइंट एक्शन प्लान’ का भी हिस्सा है जिसके तहत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को 1 बिलियन टन कम करने का लक्ष्य है।
– प्राकृतिक गैस पर घटती निर्भरता: हरित हाइड्रोजन का उत्पादन मुख्य रूप से पानी से बिजली की मदद से किया जाता है। इसके उपयोग से आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भरता और विदेशी मुद्रा खर्च दोनों कम होंगे।
– मूल्य श्रृंखला का विकास: ग्रीन हाइड्रोजन की संपूर्ण वैल्यू चेन (मूल्य श्रृंखला) विकसित होने से न केवल राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान मिलेगा, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए स्थायी आजीविका और रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।
बिहार सरकार की यह दूरगामी पहल राज्य के औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को एक नई मजबूती प्रदान करेगी।





