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Bihar Fish Production 2026: ‘विजन 2030’ से अग्रणी मत्स्य राज्य बनेगा बिहार

Bihar Fish Production 2026 के तहत 'विजन 2030' योजना से बिहार के 5 जिलों में विशेष मत्स्य क्लस्टर विकसित कर 50,200 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

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Patna: बिहार को देश के अग्रणी अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादक राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में ‘विजन 2030-बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजना’ की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान राज्य में ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) को बढ़ावा देने, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करने और मत्स्यजीवियों की आय बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

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8 परियोजनाओं के जरिए 50,200 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य

समीक्षा बैठक के दौरान डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

उन्होंने बताया कि ‘विजन 2030’ के अंतर्गत 8 प्रमुख प्राथमिकता परियोजनाओं के माध्यम से 1,848.75 हेक्टेयर प्रत्यक्ष क्षेत्र और 9,357 हेक्टेयर के परियोजना प्रभाव क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इन परियोजनाओं के जरिए कुल 50,200 मीट्रिक टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके वित्तपोषण के लिए FIDF और ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) का सहयोग लिया जाएगा।

सीवान, सारण, मुंगेर, मिथिला और मोतिहारी में बनेंगे विशेष क्लस्टर

क्षेत्रीय संभावनाओं के आधार पर राज्य के प्रमुख जिलों में विशिष्ट मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे:

  • सीवान आर्द्रभूमि क्लस्टर: आर्द्रभूमि क्षेत्रों का समग्र विकास।

  • सारण स्कैंपी क्लस्टर: मीठे पानी के बड़े झींगे का व्यावसायिक उत्पादन।

  • मुंगेर केज क्लस्टर: आधुनिक केज कल्चर (Cage Culture) तकनीक को बढ़ावा।

  • मिथिला आर्द्रभूमि क्लस्टर: मधुबनी और आसपास के क्षेत्रों में विशेष मत्स्य पालन।

  • मोतिहारी क्लस्टर: मत्स्य उत्पादन और मूल्यवर्द्धन का एकीकृत विकास।

मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को बनाया जाएगा सक्षम

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों का कौशल विकास किया जाए और उन्हें तकनीकी व आर्थिक सहयोग देकर सशक्त बनाया जाए। उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण (Processing), मूल्यवर्द्धन (Value Addition) और बाजार (Marketing) की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके।

बैठक में वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता सचिव धर्मेंद्र सिंह, मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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