फॉण्ट कनवर्टर NEW

“आईएएस पर तो हाथ, फिर आईपीएस को राहत क्यों?” : बाबूलाल मरांडी का तीखा सवाल

क्या आईपीएस अधिकारियों को हासिल है आपराधिक प्रतिरक्षा? भ्रष्टाचार, गिरफ्तारियां और उठते सवाल: क्यों सिर्फ आईएएस ही निशाने पर?

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हाल ही में प्रदेश की नौकरशाही और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर एक बड़ा और तीखा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में हो रही एकतरफा गिरफ्तारियों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर घोटाले में सिर्फ आईएएस (IAS) अधिकारियों पर ही गाज क्यों गिरती है? कानून के हाथ आईएएस अफसरों के गिरेबान तक तो आसानी से पहुंच जाते हैं, लेकिन खाकी की आड़ में छिपे रसूखदार आईपीएस (IPS) अधिकारियों तक जांच की आंच आखिर क्यों नहीं पहुंच पाती?
बाबूलाल मरांडी ने बेहद कड़े शब्दों में पूछा— “आज तक कोई भी आईपीएस अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?”

सिस्टम के दोहरे रवैये पर नेता प्रतिपक्ष का कड़ा प्रहार

नेता प्रतिपक्ष के इस बयान ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जब भी किसी राज्य में खनन, जमीन, शराब या विभिन्न विकास योजनाओं में घोटाला सामने आता है, तो केंद्रीय जांच एजेंसियां और राज्य की भ्रष्टाचार निवारण संस्थाएं (ACB) आईएएस अधिकारियों को तुरंत जांच के दायरे में लेकर सलाखों के पीछे भेज देती हैं।
लेकिन, बाबूलाल मरांडी का कहना है कि किसी भी जिले या राज्य में चल रहे अवैध कारोबार, वसूली और भ्रष्टाचार में केवल प्रशासनिक अफसर ही अकेले शामिल नहीं होते। पुलिस महकमे की सरपरस्ती और आईपीएस अधिकारियों की मूक सहमति (या सीधी संलिप्तता) के बिना इतने बड़े पैमाने पर गबन संभव ही नहीं है। इसके बावजूद, जब भी सजा और सार्वजनिक बदनामी की बात आती है, तो सारा ठीकरा अकेले आईएएस अफसरों के सिर फोड़ दिया जाता है।

क्या आईपीएस अधिकारियों को ‘सात खून माफ’ का विशेषाधिकार है?

मरांडी ने प्रशासनिक व्यवस्था के इस भेदभावपूर्ण रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या देश में आईपीएस अधिकारियों के लिए अलग कानून बना है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे पुलिस महकमे के इन आला अधिकारियों को ‘सात खून माफ’ का कोई विशेष विशेषाधिकार (Privilege) मिला हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं और पुलिस-प्रशासनिक सांठगांठ से अवैध धंधे पनप रहे हैं। इसके बावजूद, जांच एजेंसियां पुलिस विभाग के शीर्ष आकाओं पर शिकंजा कसने के बजाय उन्हें बचाती नजर आती हैं। नेता प्रतिपक्ष ने साफ किया कि अगर भ्रष्टाचार पर वाकई नकेल कसनी है, तो जांच की आंच बिना किसी पक्षपात के सफेदपोश आईएएस और रसूखदार आईपीएस दोनों तक समान रूप से पहुंचनी चाहिए।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram