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एशियन गेम्स हॉकी: भारत की दोनों टीमें फाइनल में, श्रवण कुमार बोले- रचा जा रहा इतिहास

एशियाई खेल 2026 में भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में प्रवेश किया। मंत्री सह हॉकी एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष श्रवण कुमार ने इसे ऐतिहासिक बताया।

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Patna: एशियाई खेल 2026 में भारतीय हॉकी ने दोहरा इतिहास रचते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत की महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों ने अपने-अपने सेमीफाइनल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह पक्की कर ली है। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर ग्रामीण विकास मंत्री सह हॉकी एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष श्रवण कुमार ने दोनों टीमों, खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी अपने स्वर्णिम इतिहास की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है और यह उपलब्धियां भारतीय हॉकी के पुनर्जागरण का स्पष्ट संकेत हैं।

आधुनिक प्रशिक्षण और युवा प्रतिभाओं को मौके से बदला खेल

हॉकी एसोसिएशन ऑफ बिहार के अध्यक्ष श्रवण कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी की संरचना में आमूलचूल बदलाव आया है। आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, बेहतर शारीरिक फिटनेस, अंतरराष्ट्रीय मैचों का नियमित अनुभव और जमीनी स्तर पर मजबूत घरेलू प्रतियोगिताओं ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने याद दिलाया कि पेरिस ओलंपिक 2024 में पुरुष टीम द्वारा लगातार दूसरा कांस्य पदक जीतना और वर्ष 2025 में बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में आयोजित एशिया कप का खिताब अपने नाम करना इसी व्यवस्थागत बदलाव के ठोस परिणाम हैं। अब एशियन गेम्स के फाइनल में दोनों टीमों का पहुंचना भारत की वैश्विक धाक को प्रमाणित करता है।

ग्रामीण अंचलों और छोटे कस्बों से उभरी महिला हॉकी

मंत्री ने विशेष रूप से महिला हॉकी टीम की प्रगति को बेहद उत्साहजनक और प्रेरक करार दिया। उन्होंने कहा कि महिला हॉकी का दायरा अब महानगरों से निकलकर देश के सुदूर गांवों, कस्बों और छोटे शहरों तक विस्तृत हो चुका है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियों को जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा दिखाने का उचित मंच मिला, तो उन्होंने तिरंगे की शान को दुनिया भर में चमका दिया। इससे खेल के प्रति समाज की सोच बदली है और नई पीढ़ी की बालिकाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह जगा है।

केवल पदक नहीं, यह भारतीय हॉकी का पुनर्जागरण

श्रवण कुमार ने जोर देकर कहा कि मौजूदा उपलब्धियों को केवल पदक जीतने या फाइनल तक सीमित नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। यह वास्तव में भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान की एक सुनियोजित यात्रा है। उन्होंने रेखांकित किया कि खिलाड़ियों के कठोर परिश्रम, प्रशिक्षकों की आधुनिक रणनीति और खेल प्रशासनों के पारदर्शी समन्वय से इस खेल को नई मजबूती मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों टीमें फाइनल में अपने शानदार खेल का प्रदर्शन जारी रखेंगी और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचेंगी।

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