Koderma-Jainagar: जयनगर प्रखंड के हीरोडीह के आसपास उच्च विद्यालय नहीं रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को मैट्रिक शिक्षा के लिए होती थी परेशानी । इस समस्या को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से 1980 ई में प्रस्तावित उच्च विद्यालय हीरोडीह की स्थापना की गयी थी । समिति के द्वारा स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की बहाली कर विद्यालय का संचालन किया जाने लगा।एकीकृत बिहार सरकार के शिक्षा नीति के तहत विद्यालय संचलन के लिए जारी नियमानुसार खेल मैदान एवं जरुरत के अनुसार अतिरिक्त भूमि भी उपलब्ध कराया गया।
और सरकार के सभी अहर्ताओं को पूरा किया गया। जहां बिहार सरकार के द्वारा जांचोपरांत इस विद्यालय को वर्ष 1989 में स्थापन स्वीकृति प्रदान किया गया। इसके बाद यह विद्यालय राज्य सरकार के शिक्षा नीति के तहत संचालित होने लगा। स्थापना स्वीकृति मिलने के बाद समिति के साथ उसमें कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों में परमानेंट नौकरी की आस जगने लगी। लोगों ने अपनी नौकरी के आशा के साथ निराश होकर स्थापना काल के शिक्षक सेवानिवृत्त हो गये।
सरकार के द्वारा स्थापना स्वीकृति मिलने के बाद इस विद्यालय में अध्यनरत छात्र छात्राओं को सरकार द्वारा चलाए जा रहे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा।अलग झारखंड राज्य निर्माण होने के बाद इस प्रकार से संचालित विद्यालयों को सरकार अपने अधीन में लेने के बजाय सफल संचालन के लिए विद्यालयों को अनुदान देकर शिक्षकों का मानदेय एवं विद्यालय विकास किया जा रहा है।आज इस विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। स्थानीय विधायक एवं सांसद के द्वारा एक दो कमरों का निर्माण कराया गया है उसी में विद्यालय संचालित हो रहा है।
वर्तमान समय में इस समय वर्ग आठ से दशम वर्ग तक संचालित है और 354 छात्र-छात्राएं अध्यनरत हैं। जानकारी के अनुसार इस विद्यालय स्थापना के पहले इस क्षेत्र के बच्चे बच्चियों को अभिभावकों द्वारा मैट्रिक परीक्षा पास कराना उनके बस की बात नहीं थी लेकिन इस विद्यालय के स्थापना होने से क्षेत्र के बालिकाओं को भी मैट्रिक परीक्षा में अच्छे परिणाम के साथ सफलता हासिल कर रहे हैं।




