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बीजेपी छोड़ अन्नामलाई ने फूंका नया बिगुल, ‘जेन-जी’ युवाओं का मिला साथ!

Chennai: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ने के बाद तमिलनाडु के फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई ने अपनी राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल ली है। पारंपरिक राजनीति से इतर अब वे सीधे तौर पर ‘जेन-जी’ (आज के दौर के युवा) की तरफ मुड़ गए हैं।

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Chennai: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ने के बाद तमिलनाडु के फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई ने अपनी राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल ली है। पारंपरिक राजनीति से इतर अब वे सीधे तौर पर ‘जेन-जी’ (आज के दौर के युवा) की तरफ मुड़ गए हैं। युवाओं को खुद से जोड़ने के लिए उन्होंने एक अनोखा और बड़ा डिजिटल राजनीतिक आंदोलन खड़ा करना शुरू कर दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके इस नए महामूवमेंट में लॉन्चिंग के कुछ ही दिनों के भीतर 10 लाख से ज्यादा युवा अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

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बीजेपी से अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ दिन बाद चेन्नई के ईसीआर (ECR) इलाके में स्थित उनके निजी आवास पर भारी सियासी हलचल देखी जा रही है। वहां उनकी कोर टीम के सदस्य लगातार लैपटॉप पर डेटा खंगालने, फोन पर रणनीतिक बातें करने और भविष्य के रोडमैप को लेकर गंभीर चर्चाओं में डूबे नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, अन्नामलाई का बीजेपी से अलग होना बिना किसी हंगामे या हाई-वोल्टेज ड्रामे के हुआ था। अचानक दिल्ली यात्रा और पार्टी हाईकमान से हुई सीधी बातचीत के बाद उन्होंने शालीनता से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि, अब जो अंदरूनी खबरें आ रही हैं, वे तमिलनाडु की राजनीति को हिला देने वाली हैं। अन्नामलाई का नया राजनीतिक मूवमेंट ‘वी द लीडर्स’ (We The Leaders) युवाओं के बीच इतनी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है कि रजिस्ट्रेशन कराने वालों का आंकड़ा 10 लाख को पार कर चुका है और यह संख्या हर सेकंड बढ़ रही है। नई पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए बनाई गई इस विशेष वेबसाइट पर लोग खुलकर अपना समर्थन और रुचि दिखा रहे हैं।

बीजेपी से अलग होने की बताई बड़ी वजह

अपने पहले डिजिटल संदेश में के. अन्नामलाई ने साफ किया कि बीजेपी से अलग होने का मुख्य कारण भविष्य के लक्ष्यों और प्राथमिकताओं में अंतर होना था। हालांकि, उन्होंने विरोधियों को जवाब देते हुए कहा कि वे राजनीति से सन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि अब वे युवाओं की ताकत के भरोसे इसे नए अंदाज में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने राज्य की राजनीति की बुनियादी समस्याओं को तुरंत हल करने की जरूरत बताई। अन्नामलाई ने कहा, “लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आप तमिल हैं या भारतीय? यह एक बहुत पुराना और थका देने वाला विवाद है। मैं हमेशा गर्व से कहता हूं कि मैं एक ऐसा सच्चा और गौरवान्वित भारतीय हूं, जो तमिलनाडु की समृद्ध संस्कृति और महान परंपराओं में पूरी तरह डूबा हुआ है।”

अन्नामलाई ने साफ कर दिया कि अब उनका राजनीतिक लक्ष्य बहुत बड़ा है। वे क्षेत्रीयता की संकीर्ण राजनीति को दरकिनार करते हुए, स्थानीय तमिल हितों की रक्षा के साथ एक प्रगतिशील और एकजुट राजनीति का नया दौर लाना चाहते हैं। वे समाज को बांटने वाली विभाजनकारी सोच के खिलाफ खड़े होंगे और सत्ता की मलाई खा रहे लोगों को सीधे जनता के प्रति जवाबदेह बनाएंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ सोशल मीडिया का लिया सहारा

टीम से जुड़े बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई अब मुख्यधारा के पारंपरिक मीडिया (टीवी और अखबारों) की बजाय सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं की नब्ज टटोल रहे हैं। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (टीवीके पार्टी प्रमुख) की ही तरह अन्नामलाई ने भी लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय सीधे सोशल मीडिया पर जनता से संवाद करने का आधुनिक तरीका चुना है। टीम के एक प्रमुख रणनीतिकार ने बताया, “हमारे नेता की विचारधारा राष्ट्रवाद और विशुद्ध तमिल पहचान व दर्शन का एक अनोखा मिश्रण है। अगर तमिलनाडु के हक की बात आई, तो जरूरत पड़ने पर हम बीजेपी और केंद्र सरकार के खिलाफ भी खुलकर मुद्दे उठाएंगे।” इसका सीधा उदाहरण अन्नामलाई का वह हालिया ट्वीट है, जो उन्होंने केंद्र की ‘तीन भाषा नीति’ के खिलाफ खुलकर किया था।

अन्नामलाई का साफ मानना है कि दक्षिण के सुपरस्टार थलपति विजय के सियासी उभार के खिलाफ लड़ने के लिए तमिलनाडु में एक कद्दावर और करिश्माई युवा नेता की जगह पूरी तरह खाली है, जिसे वे अपनी लोकप्रियता से आसानी से भर सकते हैं। अगले कुछ महीनों में उनका पूरा ध्यान ‘वी द लीडर्स’ प्लेटफॉर्म पर करोड़ों नए सदस्य जोड़ने और साल 2031 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अभी से एक अभेद्य जमीन तैयार करने पर रहेगा।

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सूत्रों का यह भी दावा है कि इस नए सफर में सुपरस्टार रजनीकांत का मौन समर्थन हमेशा अन्नामलाई के साथ रहेगा। दरअसल, रजनीकांत की पत्नी लता रजनीकांत ने भी हाल ही में इसी तरह के एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत की है। कुल मिलाकर देखा जाए तो तमिलनाडु की राजनीति एक बेहद दिलचस्प और नई दिशा में मुड़ चुकी है। एक तरफ सी. जोसेफ विजय हैं, जिन्होंने महज 28 महीनों की तैयारी में बड़ी ताकत हासिल की है, दूसरी तरफ दशकों पुरानी द्रविड़ पार्टियां (द्रमुक-अन्नाद्रमुक) अपने पुराने किले के भरोसे हैं। ऐसे में नाम तमिलर कांची जैसी पार्टियों के बीच अन्नामलाई एक नई और बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। अब देखना यह होगा कि डिजिटल हथियारों से लैस अन्नामलाई, थलपति विजय और द्रविड़ राजनीति को कितनी कड़ी टक्कर दे पाते हैं।

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