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फादर लिवेन्स और कामिल बुल्के की कहानी अब किताबों में, गुमला में लोकार्पण

शहर के पर्यटन भवन में सोमवार को लेखक सुनील कुमार बरनवाल की लिखी फादर कॉन्स्टेंट लिवेन्स और फादर कामिल बुल्के पर आधारित दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।

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गुमला: शहर के पर्यटन भवन में सोमवार को लेखक सुनील कुमार बरनवाल की लिखी फादर कॉन्स्टेंट लिवेन्स और फादर कामिल बुल्के पर आधारित दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। शैलांचल प्रकाशन के तत्वावधान में आयोजित समारोह में जनजातीय समाज, मिशनरी गतिविधियों, धर्मांतरण के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर परिषद अध्यक्ष शंकुतला उरांव ने की।

मुख्य अतिथि पूर्व जिला वन पदाधिकारी लक्ष्मीनाथ बड़ाईक और विशिष्ट अतिथि जिला पड़हा के पूर्व बेल राजबेल उरांव समेत अन्य अतिथियों ने पुस्तकों का विमोचन किया।लेखक सुनील कुमार बरनवाल ने बताया कि फादर कॉन्स्टेंट लिवेन्स पर आधारित पुस्तक में छोटानागपुर में कैथोलिक मिशनरी गतिविधियों के विस्तार, धर्मांतरण के इतिहास, जेसुइट मिशन की कार्यप्रणाली और जनजातीय समाज पर उसके प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। इसमें बिरसा आंदोलन और औपनिवेशिक दौर से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है।
वहीं, फादर कामिल बुल्के पर लिखी पुस्तक में हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान, रामकथा पर शोध, बाइबिल के हिंदी अनुवाद और भारतीय दर्शन से जुड़े उनके कार्यों को स्थान दिया गया है।

समारोह में शंकुतला उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति, परंपराएं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा उसकी विशिष्ट पहचान हैं। इनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। लक्ष्मीनाथ बड़ाईक ने कहा कि इतिहास और समाज पर गंभीर अध्ययन से विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर मिलता है। मौके पर राजबेल उरांव, मनोज बड़ाईक, महेंद्र उरांव, प्रो. दीपक कुमार समेत कई लोग मौजूद थे।

– रिपोर्टर: सुंदरम कुमार

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