Patna: प्रदेश में नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के साथ नशे की लत से उबर रहे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी कवायद शुरू की जा रही है। नशामुक्ति केंद्रों में इलाज करा रहे लोगों, खासकर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ा जाएगा।
साथ ही नशामुक्ति केंद्रों में प्रशिक्षित काउंसलर, चिकित्सक और अन्य जरूरी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि उपचार के बाद इन युवाओं का बेहतर तरीके से पुनर्वास हो सके और वे दोबारा नशे की गिरफ्त में न जाएं। इसके लिए समाज कल्याण विभाग एक विशेष कार्ययोजना को जल्द मूर्तरूप देगा। ये बातें समाज कल्याण विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने कहीं। वे पटना स्थित दशरथ मांझी श्रम नियोजन एवं अध्ययन संस्थान में समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
तीन महत्वपूर्ण विषयों पर हुई चर्चा
कार्यशाला में नशामुक्त भारत अभियान, दिव्यांगजनों के कल्याण एवं दिव्यांगता के क्षेत्र में शुरुआती हस्तक्षेप तथा विकसित भारत के लिए सुगम्य भारत अभियान जैसे तीन महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष दो हजार पच्चीस से छब्बीस में राज्यभर में नौ हजार पाँच सौ सत्ताईस जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से आठ लाख छियालीस हजार एक सौ सतहत्तर लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित तेरह नशामुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता, उपचार व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यशाला में विभिन्न विभागों और विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके।
एक सौ एक बुनियाद केंद्रों पर होगी स्क्रीनिंग
दिव्यांग बच्चों की समय रहते पहचान और उपचार के लिए राज्य के एक सौ एक बुनियाद केंद्रों पर स्वास्थ्य स्थितियों की स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत फिलहाल राज्य के नौ प्रमंडलों में जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र संचालित हैं, जहां चौवालीस प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों की स्क्रीनिंग की जाती है। अब इस व्यवस्था का विस्तार बुनियाद केंद्रों तक करने की योजना है। बच्चों के विकास के लिहाज से शून्य से छह वर्ष की उम्र बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान किसी भी प्रकार की दिव्यांगता या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की पहचान कर समय पर हस्तक्षेप किया जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। वर्ष दो हजार ग्यारह की जनगणना के अनुसार देश में दो करोड़ सड़सठ लाख और बिहार में तेरह लाख इकतीस हजार दिव्यांगजन हैं।
चौदह सुगम्य बसों की होगी खरीद
सुगम्य भारत अभियान के तहत दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक स्थलों और परिवहन सुविधाओं को सुलभ बनाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। बिहार में अब तक चौवालीस हजार सात सौ पचपन सार्वजनिक संस्थानों और पैंतालीस वेबसाइटों को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया गया है, जबकि पंद्रह बस स्टैंडों को सुगम्य बनाया जा चुका है। इसके अलावा दिव्यांगजनों की आवागमन संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चौदह सुगम्य बसों की खरीद प्रक्रिया चल रही है। सचिव ने कहा कि जागरूकता, समय पर उपचार और सुगम्य सुविधाओं का विस्तार ही समावेशी एवं सशक्त समाज के निर्माण का आधार है।
नशे की लत का समग्र उपचार जरूरी
कार्यशाला में नालंदा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉक्टर संतोष ने कहा कि नशे की लत केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं से जुड़ी एक जटिल समस्या है। वर्ष दो हजार सोलह में शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार के सभी अड़तीस जिलों में एक-एक नशामुक्ति इकाई शुरू की गई थी, जबकि पटना में दो केंद्र स्थापित किए गए। नालंदा मेडिकल कॉलेज स्थित नशामुक्ति केंद्र में अब तक करीब तेरह हजार पाँच सौ मरीजों का ओपीडी में उपचार किया जा चुका है, वहीं साढ़े तीन हजार से चार हजार मरीजों को भर्ती कर इलाज दिया गया है।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास निगम की प्रबंध निदेशक इनायत खान, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की निदेशक डॉक्टर प्रीति, दिव्यांगजन सशक्तीकरण निदेशालय की निदेशक अंजलि शर्मा समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।







