New Delhi/Patna: बिहार के ग्रामीण विकास विभाग तथा सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में आयोजित इंडियन पॉलिटी एंड कॉन्स्टिट्यूशन अंतर महाविद्यालय क्विज प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार बनने का संदेश दिया।
राजनीति का वास्तविक उद्देश्य जनकल्याण
श्रवण कुमार ने कहा कि राजनीति का वास्तविक उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और जनकल्याण होना चाहिए। लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। विचारों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें मनभेद में नहीं बदलना चाहिए। संवाद, सहमति और असहमति का सम्मान ही लोकतंत्र की मजबूती है।
बिहार में महिला सशक्तीकरण और बदलाव
बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष दो हजार छह में पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष दो हजार सात में नगर निकायों में महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर दिया गया। वहीं सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए पैंतीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल योजना ने ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने, पेयजल से होने वाले रोगों से बचाव और विशेष रूप से महिलाओं को पानी लाने की कठिनाई से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये पहलें सामाजिक न्याय, सुशासन और जनकल्याण के प्रति बिहार सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
गांवों के विकास से साकार होगा ग्राम स्वराज
ग्रामीण विकास पर उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं का विस्तार ही समग्र विकास का आधार है। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की अवधारणा को साकार करने में पंचायती राज व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, सही सूचना साझा करने और अफवाहों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा सामाजिक सद्भाव, समानता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन युवाओं में संवैधानिक चेतना और लोकतांत्रिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।







